श्रीमद्भागवत कथा श्रवण करने की सार्थकता तभी है,जब हम सभी इस ग्रन्थ को अपने जीवन में आत्मसात करें : संतश्री प्रेमधन लालनजी महाराज

न्दावन।कालीदह क्षेत्र स्थित राधा कृपा आश्रम में लाला सट्टनलाल अग्रवाल परिवार (मुम्बई) के द्वारा ठाकुरश्री ब्रजवल्लभ लाल महाराज एवं सद्गुरुश्री सन्त मां ब्रजदेवी जी के पावन सानिध्य में चल रहा सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ महोत्सव विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ संपन्न हुआ।

Nov 29, 2025 - 13:43
Nov 29, 2025 - 13:44
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श्रीमद्भागवत कथा श्रवण करने की सार्थकता तभी है,जब हम सभी इस ग्रन्थ को अपने जीवन में आत्मसात करें : संतश्री प्रेमधन लालनजी महाराज

श्रीमद्भागवत कथा श्रवण करने की सार्थकता तभी है,जब हम सभी इस ग्रन्थ को अपने जीवन में आत्मसात करें : संतश्री प्रेमधन लालनजी महाराज

(डॉ. गोपाल चतुर्वेदी)

वृन्दावन।कालीदह क्षेत्र स्थित राधा कृपा आश्रम में लाला सट्टनलाल अग्रवाल परिवार (मुम्बई) के द्वारा ठाकुरश्री ब्रजवल्लभ लाल महाराज एवं सद्गुरुश्री सन्त मां ब्रजदेवी जी के पावन सानिध्य में चल रहा सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ महोत्सव विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ संपन्न हुआ। जिसके अंतर्गत प्रातः काल संतश्री लालनजी महाराज के पावन सानिध्य में श्रीयमुना महारानी का वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य पूजन-अर्चन कर उनका चुनरी मनोरथ किया गया।साथ ही सन्त, विप्र, ब्रजवासी वैष्णव सेवा एवं वृहद भंडारा हुआ।

जिसमें सैकड़ों व्यक्तियों को भोजन प्रसाद ग्रहण कराकर उन्हें ऊनी कम्बल, छतरी, शॉल एवं दक्षिणा आदि वितरित की गई।सद्गुरुश्री सन्त मां ब्रजदेवी एवं राष्ट्रपति पुरुस्कार प्राप्त प्रख्यात रासाचार्य स्वामी फतेह कृष्ण शर्मा ने कहा कि श्रीधाम वृन्दावन लीला पुरुषोत्तम भगवान श्रीकृष्ण और उनकी आल्हादिनी शक्ति स्वरूपा श्रीराधा रानी की क्रीड़ा स्थली है।यहां की रज आज भी प्रभु भक्तों को उनकी अनुभूति कराती है।इसीलिए हमें सदा ही ब्रज रज को अपने मस्तक पर धारण करना चाहिए।


सन्तश्री प्रेमधन लालनजी महाराज ने समस्त भक्तों-श्रद्धालुओं को अपने आशीर्वचन देते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत कथा श्रवण करने की सार्थकता तभी है,जब हम सभी इस ग्रन्थ को अपने जीवन में आत्मसात कर लें।इसीलिए सभी भक्त ये संकल्प लें ,कि इन सात दिनों में हमने श्रीमद्भागवत महापुराण की कथा से जो भी श्रवण किया है,उसे अपने जीवन में धारण करेंगे।साथ ही आजीवन उसके बताए मार्ग पर चल कर प्रभु का गुणगान करेंगे।

इस अवसर पर प्रख्यात साहित्यकार "यूपी रत्न" डॉ. गोपाल चतुर्वेदी, पण्डित रवि शर्मा, स्वामी राधाकांत शर्मा (छोटे स्वामी), कृष्णांशु शर्मा, मुख्य यजमान अशोक कुमार अग्रवाल एवं डॉ. राधाकांत शर्मा आदि की उपस्थिति विशेष रही।

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