मन की बात : जनता से जुड़ने का नया अध्याय
भारत में संवाद की परंपरा बहुत पुरानी रही है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे एक नए आयाम पर पहुँचाया है।
मन की बात : जनता से जुड़ने का नया अध्याय
सईद अहमद-
भारत में संवाद की परंपरा बहुत पुरानी रही है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे एक नए आयाम पर पहुँचाया है। रेडियो कार्यक्रम “मन की बात” आज केवल एक प्रसारण नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की भावनाओं और आकांक्षाओं से सीधा जुड़ा हुआ मंच बन चुका है।
हर महीने के अंतिम रविवार को जब घड़ी “मन की बात” का समय बताती है, तो देशभर के लोग उत्सुकता से इसे सुनने बैठ जाते हैं। गाँव हो या शहर, किसान हो या व्यापारी, छात्र हो या गृहिणी—हर वर्ग के लोग इस कार्यक्रम से अपने जीवन की किसी न किसी प्रेरणा को ग्रहण करते हैं।
जनसंवाद की नई परंपरा
2014 में शुरुआत के समय इस कार्यक्रम को हल्के में लिया गया था, लेकिन धीरे-धीरे यह एक जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। इसका सबसे बड़ा महत्व यह है कि प्रधानमंत्री ने सत्ता की ऊँचाइयों से उतरकर आम नागरिकों के बीच सीधा संवाद कायम किया।
आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी का संदेश
नवीनतम एपिसोड में प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को फिर दोहराया। उन्होंने “वोकल फॉर लोकल” का आह्वान करते हुए त्यौहारों के समय लोगों से अपील की कि वे भारतीय उत्पादों को अपनाएँ।
यह केवल आर्थिक मजबूती का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता का भी प्रश्न है।
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