उत्तर प्रदेश में अस्पतालों की फार्मेसियों की जांच में दवाओं की कीमतों को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, एक इंजेक्शन जिसकी अस्पताल की खरीद कीमत लगभग ₹74 थी, उसी पर ₹4,980.94 की MRP दर्ज मिली। यानी खरीद कीमत और MRP में करीब 67 गुने का अंतर!
यह सिर्फ एक दवा का मामला नहीं बताया जा रहा। जांच में कई ऐसी दवाएं मिलीं जिनकी MRP खरीद कीमत से कई गुना अधिक थी।
सवाल यह है कि दवाओं की कीमत तय करने की व्यवस्था में इतनी बड़ी खाई कैसे बन रही है?

मरीज और उसके परिवार को दवा की असली कीमत, MRP और अस्पताल की खरीद कीमत के बारे में पारदर्शी जानकारी मिलनी चाहिए।
यह किसी एक अस्पताल या व्यक्ति पर आरोप लगाने का विषय नहीं है—यह पूरे सिस्टम में पारदर्शिता और मरीज के हित का सवाल है।

मैं वीरेश तिवारी, जनहित में सरकार और संबंधित विभाग से मांग करता हूं कि ऐसे मामलों की पूरी जांच हो और यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदारी तय की जाए।