कैप्टन स्मित मच्छार ने संकट की घड़ी में दिखाया अदम्य साहस और सूझबूझ°
-विमान में बैठे यात्रियों के लिए उड़ान का समय सामान्यतः रोमांच और सुविधा का अनुभव होता है, लेकिन जब हजारों फीट की ऊंचाई पर अचानक कोई गंभीर संकट सामने आ जाए तो कुछ ही क्षणों मेंपूरी स्थिति जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष में बदल सकती है। ऐसे समय में विमान के पायलट कीभूमिका केवल विमान उड़ाने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि उसकी सूझबूझ, धैर्य, निर्णय क्षमता औरसाहस सैकड़ों लोगों के जीवन की रक्षा का आधार बन जाते हैं। हाल की एक घटना ने एक बार फिर यहसाबित किया है कि संकट के सामने मजबूत हौसला और पेशेवर जिम्मेदारी कितनी बड़ी ताकत बनसकती है।दुबई से इजरायल जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान में सामने आए गंभीर खतरे के दौरान कैप्टन स्मितमच्छार ने जिस तरह परिस्थितियों का सामना किया, उसने उन्हें चर्चा के केंद्र में ला दिया है। विमान केभीतर अचानक पैदा हुए संकट ने यात्रियों और चालक दल के सामने असाधारण चुनौती खड़ी कर दी थी।ऐसी स्थिति में घबराहट फैलना स्वाभाविक था, लेकिन विमान के संचालन से जुड़े लोगों के लिए सबसे जरूरी था कि वे संयम बनाए रखें और यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।
कैप्टन स्मित कीभूमिका इसी जिम्मेदारी की मिसाल के रूप में सामने आई।किसी भी विमान के कॉकपिट में बैठे पायलट पर सैकड़ों यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी होती है।सामान्य परिस्थितियों में उड़ान भरना, दिशा बदलना और विमान को सुरक्षित उतारना भी विशेषज्ञता काकाम है, लेकिन आपात स्थिति में यही जिम्मेदारी कई गुना बढ़ जाती है। उस समय पायलट को बहुतकम समय में उपलब्ध विकल्पों का आकलन कर निर्णय लेना पड़ता है। एक छोटी सी चूक भी गंभीरपरिणाम पैदा कर सकती है। कैप्टन स्मित के अनुभव और धैर्य ने ऐसे ही कठिन समय में उनकी पेशेवरक्षमता को सामने रखा।कैप्टन स्मित मूल रूप से गुजरात से हैं। दिलचस्प बात यह है कि बचपन में उनका सपना पायलट बननेका नहीं था। उनका झुकाव परिवार के कारोबार को आगे बढ़ाने की ओर था।
उन्होंने टेक्सटाइलइंजीनियरिंग और प्रबंधन की पढ़ाई भी की। बाद में एक विमानन संबंधी कार्यक्रम में भाग लेने के बाद उनके जीवन की दिशा बदल गई। विमानन की दुनिया ने उन्हें आकर्षित किया और उन्होंने वाणिज्यिकपायलट बनने का निर्णय लिया। इसके बाद उन्होंने न्यूजीलैंड में उड़ान प्रशिक्षण लिया और कठिनप्रशिक्षण के बाद व्यावसायिक विमानन में अपना करियर बनाया।
एक पायलट के रूप में उनकी पहली उड़ान बेंगलुरु से दिल्ली के बीच रही। इसके बाद उन्होंने फ्लाईदुबईमें अपना करियर आगे बढ़ाया। उन्हें वाणिज्यिक विमान उड़ाने का 13 वर्ष से अधिक का अनुभव है औरबोइंग 737 विमान पर लगभग 9750 घंटे उड़ान का अनुभव बताया जाता है। इतने लंबे अनुभव कामहत्व तभी समझ में आता है जब पायलट को अचानक सामान्य परिस्थितियों से अलग किसी चुनौतीका सामना करना पड़े। वर्षों के प्रशिक्षण और अनुभव से विकसित निर्णय क्षमता ऐसे समय में सबसे बड़ासहारा बनती है।इस घटना ने विमान में पायलट के साथ पूरे चालक दल की भूमिका को भी रेखांकित किया है।
यात्रियोंकी सुरक्षा केवल कॉकपिट तक सीमित नहीं होती। केबिन क्रू भी आपात परिस्थितियों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाता है। यात्रियों को शांत रखना, उन्हें सुरक्षा संबंधी निर्देश देना और कठिन परिस्थितियोंमें व्यवस्थित ढंग से काम करना चालक दल की सामूहिक जिम्मेदारी होती है। इसलिए विमान कीसुरक्षित यात्रा के पीछे पायलट और केबिन क्रू दोनों का तालमेल महत्वपूर्ण होता है।
कैप्टन स्मित ने घटना से पहले भी एक बातचीत में आपात स्थिति के दौरान केबिन क्रू की भूमिका कोमहत्वपूर्ण बताया था। यह विचार उनकी पेशेवर सोच को दर्शाता है कि विमान में सुरक्षा किसी एकव्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरी टीम के अनुशासन और समन्वय का परिणाम है। संकट के समययही टीम भावना यात्रियों के लिए सुरक्षा कवच बनती है।विमानन इतिहास में ऐसे अनेक अवसर आए हैं जब पायलट और चालक दल ने असाधारण परिस्थितियोंमें यात्रियों की जान बचाई। वर्ष 1988 में अलोहा एयरलाइंस की उड़ान के दौरान ऊंचाई पर विमान काएक बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बावजूद चालक दल ने विमान को सुरक्षित उतारने काप्रयास किया। वर्ष 2009 में अमेरिका में एक विमान के दोनों इंजनों पर पक्षियों के झुंड से टकराने केबाद पायलटों ने बेहद कठिन परिस्थिति में विमान को हडसन नदी में उतारा और बड़ी संख्या में यात्रियों की जान बची।
इसी तरह विमानन इतिहास में नीरजा भानोट का नाम भी साहस और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक मानाजाता है। 1986 में एक विमान के अपहरण के दौरान उन्होंने यात्रियों की सुरक्षा के लिए असाधारणसाहस दिखाया और कई यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकलने में मदद की। ऐसे उदाहरण बताते हैं किविमानन क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की जिम्मेदारी केवल तकनीकी दक्षता तक सीमित नहीं है।जरूरत पड़ने पर उन्हें अपने साहस और मानवीय संवेदना की भी परीक्षा देनी पड़ती है।कैप्टन स्मित मच्छार की घटना भी इसी व्यापक परंपरा की एक कड़ी के रूप में देखी जा सकती है।आसमान में संकट आने पर यात्रियों के पास निर्णय लेने का अवसर नहीं होता। उनकी सुरक्षा कीजिम्मेदारी पूरी तरह विमान के चालक दल पर होती है। ऐसे में पायलट का शांत रहना, परिस्थितियों को
समझना और सही समय पर सही निर्णय लेना बेहद महत्वपूर्ण होता है।इस घटना ने यह भी याद दिलाया है कि विमानन की चमकदार दुनिया के पीछे कितनी बड़ी जिम्मेदारीछिपी होती है। यात्रियों को कुछ घंटे की यात्रा सामान्य और सहज दिखाई देती है, लेकिन कॉकपिट में बैठेपायलट के लिए हर उड़ान गंभीर जिम्मेदारी का निर्वहन होती है। हजारों फीट की ऊंचाई पर सैकड़ों लोगों
की सुरक्षा उसके निर्णयों से जुड़ी होती है।
कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी इसलिए उल्लेखनीय है कि संकट की घड़ी में उन्होंने अपने कर्तव्य कोसर्वोपरि रखा। उनका अनुभव, प्रशिक्षण और धैर्य उस समय यात्रियों के लिए सबसे बड़ा भरोसा बना।ऐसी घटनाएं हमें यह समझाती हैं कि तकनीक चाहे कितनी भी आधुनिक हो जाए, आपात स्थिति मेंइंसानी हिम्मत, विवेक और जिम्मेदारी का महत्व कभी कम नहीं होता। विमान के कॉकपिट में बैठेपायलट के हाथों में केवल नियंत्रण नहीं होता, बल्कि सैकड़ों जिंदगियों का भरोसा भी होता है। कैप्टनस्मित ने इसी भरोसे की गरिमा को अपने साहस से मजबूत किया है।