आज के समय में एक अजीब दौड़ दिखाई देती है। कोई मंत्री के साथ सेल्फी ले रहा है, कोई बड़े अधिकारी के साथ, कोई किसी प्रसिद्ध संत-महात्मा के साथ और कोई किसी चर्चित व्यक्ति के साथ फोटो खिंचवाकर पूरे दिन उसे सोशल मीडिया पर दिखा रहा है।
सवाल यह नहीं है कि किसी बड़े व्यक्ति के साथ फोटो क्यों ली?
सवाल यह है कि उस फोटो के बाद आपने अपने जीवन में क्या बड़ा किया?
अगर किसी बड़े व्यक्ति के साथ खड़े होकर ली गई सेल्फी ही आपकी सबसे बड़ी उपलब्धि बन गई है, तो शायद आपको एक बार रुककर अपने बारे में सोचना चाहिए।
वीरेश तिवारी का विचार है—बड़ों के पीछे-पीछे भागने से आपका कद बड़ा नहीं होता। अपना कद इतना बड़ा कीजिए कि एक दिन बड़े लोग आपके साथ खड़े होकर फोटो लेना चाहें।
किसी मंत्री के साथ आपकी एक तस्वीर आपको मंत्री नहीं बना सकती। किसी बड़े अधिकारी के साथ आपकी सेल्फी आपको अधिकारी नहीं बना सकती। किसी संत के साथ फोटो आपको संत नहीं बना सकती।
लेकिन आपकी मेहनत, आपकी ईमानदारी, आपका ज्ञान, आपका व्यवहार और समाज के लिए आपका काम—ये चीजें आपको सचमुच बड़ा आदमी बना सकती हैं।
आज हम कई बार यह साबित करने में लगे रहते हैं कि “देखो, मेरी पहुँच कितने बड़े लोगों तक है।”
लेकिन असली सवाल होना चाहिए—
“देखो, मैंने अपने दम पर क्या हासिल किया है?”
आप अपने बच्चे की सफलता की तस्वीर रखिए। परिवार के साथ बिताए अच्छे पल की तस्वीर रखिए। अपने मित्रों के साथ वर्षों पुरानी दोस्ती की तस्वीर रखिए। अपने काम करते हुए, किसी जरूरतमंद की मदद करते हुए, पुस्तक पढ़ते हुए, पूजा करते हुए, योग करते हुए, मेहनत करते हुए, समाज के लिए कुछ करते हुए अपनी तस्वीर रखिए।
इन तस्वीरों में आपका अपना जीवन दिखाई देगा।
बड़े आदमी के साथ खड़े होने से कुछ समय के लिए लोग आपको पहचान सकते हैं, लेकिन अपने काम के साथ खड़े होने से लोग आपको वर्षों तक याद रखते हैं।
और एक बात और समझने की जरूरत है।
कई बार हम किसी बड़े व्यक्ति के साथ बार-बार दिखाई देकर यह संदेश देने लगते हैं कि हमारी बहुत पहुँच है। फिर लोग हमारे पास अपने काम लेकर आने लगते हैं। हम हर काम नहीं करा पाते। कहीं मनमुटाव होता है, कहीं संबंध खराब होते हैं और कहीं सामने वाला बड़ा व्यक्ति स्वयं असहज हो जाता है।
क्योंकि किसी बड़े व्यक्ति के करीब होना और उसके नाम का इस्तेमाल करके अपना कद बढ़ाना—दो अलग बातें हैं।
बड़े लोगों से मिलिए, उनका सम्मान कीजिए, उनसे सीखिए, उनका आशीर्वाद लीजिए। लेकिन अपनी पहचान उनकी छाया में मत खोइए।
किसी की छाया में खड़े होकर लंबा दिखाई देने से अच्छा है कि धूप में खड़े होकर अपना कद बढ़ाया जाए।
मैंने इस विषय पर पहले भी लिखा है और आज फिर लिख रहा हूँ, क्योंकि मुझे लगता है कि यह छोटी-सी बात बहुत से लोगों का जीवन बदल सकती है।
सुबह उठिए और अपने आप से पूछिए—
आज मैं ऐसा क्या करूँगा, जिससे मेरी अपनी पहचान बने?
एक किताब पढ़िए।
अपने काम में कुछ नया सीखिए।
अपने शरीर को स्वस्थ रखिए।
परिवार को समय दीजिए।
किसी जरूरतमंद की मदद कीजिए।
अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाइए।
अपने बच्चों को समय दीजिए।
समाज के लिए कुछ कीजिए।
और फिर शाम को अगर सेल्फी लेनी ही है, तो ऐसी तस्वीर लीजिए जिसमें आपका जीवन दिखाई दे, आपकी मेहनत दिखाई दे, आपका परिवार दिखाई दे और आपकी पहचान दिखाई दे।
क्योंकि जीवन का उद्देश्य यह साबित करना नहीं है कि हम किन बड़े लोगों के करीब हैं।
जीवन का उद्देश्य यह है कि हम खुद इतने बड़े बनें कि हमारी पहचान के लिए किसी दूसरे का नाम लेने की जरूरत न पड़े।
याद रखिए—
बड़ों के पीछे-पीछे मत भागिए।
खुद आगे बढ़िए।
अपना रास्ता बनाइए।
अपना नाम बनाइए।
एक दिन वही लोग आपके पीछे आएँगे, जिनके पीछे आज आप भाग रहे हैं।
यही आत्मसम्मान है।
यही आत्मनिर्भरता है।
और यही असली सफलता है।
— वीरेश तिवारी