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Updated: 21 September 2026 | Hindi News Portal
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आज का मुद्दा पर प्रकाशित खबरों में स्थानीय संदर्भ, सत्यापन और पाठकों के काम की जानकारी को प्राथमिकता दी जाती है।
Uttar Pradesh

अनुबंध खत्म, फिर भी चिनार इम्पेक्स के फुटओवर ब्रिज पर विज्ञापन जारी!

96 वर्गमीटर की अनुमति के मुकाबले करीब 200 वर्गमीटर विज्ञापन का मामला, मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत के बाद भी कार्रवाई नही लापरवाही या मिलीभगत से सरकारी राजस्व को करोड़ों की चपत का

आज का मुद्दा डिजिटल डेस्क | Updated: 01 Sep 2026, 10:37 AM | Views: 0 | 4 मिनट पढ़ें
अनुबंध खत्म, फिर भी चिनार इम्पेक्स के फुटओवर ब्रिज पर विज्ञापन जारी!

इस रिपोर्ट में क्या खास है?

  • खबर को स्थानीय पाठकों के संदर्भ में सरल भाषा में समझाया गया है।
  • जहां उपलब्ध हो, आधिकारिक जानकारी, प्रत्यक्ष बयान और जमीन से मिली जानकारी को आधार बनाया जाता है।
  • नई जानकारी आने पर रिपोर्ट को अपडेट किया जाता है और तारीख ऊपर दी जाती है।

नोएडा। कालिंदी कुंज प्रवेश मार्ग पर महामाया फ्लाईओवर से पूर्व स्थित फुटओवर ब्रिज के निर्माण, विकास, संचालन एवं रखरखाव से जुड़े अनुबंध में संभावित अनियमितताओं का मामला गंभीर होता जा रहा है। चिनार इम्पेक्स को दिए गए इस कार्य का अनुबंध लगभग 10 वर्ष की अवधि के लिए था, जिसकी अवधि उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार 27 जनवरी 2026 को समाप्त हो चुकी है। इसके बावजूद फुटओवर ब्रिज पर विज्ञापन एवं अन्य व्यावसायिक गतिविधियां जारी रहने से नोएडा प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

नोएडा प्राधिकरण द्वारा जॉब नंबर 177/PE (PH)/2013-14 एवं कॉन्ट्रैक्ट बॉन्ड नंबर 22/PE (WC-07)/2015-16 के अंतर्गत कालिंदी कुंज प्रवेश मार्ग पर महामाया फ्लाईओवर से पूर्व स्थित फुटओवर ब्रिज के कंस्ट्रक्शन, डेवलपमेंट, ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस (CDOM) का कार्य चिनार इम्पेक्स, बी-20, सेक्टर-57, नोएडा को आवंटित किया गया था।

96 वर्गमीटर की अनुमति, करीब 200 वर्गमीटर में विज्ञापन का सवाल

मामले में विज्ञापन क्षेत्रफल सबसे बड़ा सवाल बनकर सामने आया है। जानकारी के अनुसार अनुबंध के तहत करीब 96 वर्गमीटर क्षेत्रफल में विज्ञापन प्रदर्शन की अनुमति थी, जबकि मौके पर करीब 200 वर्गमीटर क्षेत्रफल में विज्ञापन प्रदर्शित किए जाने की जानकारी है।

यदि मौके पर होने वाले भौतिक सत्यापन में यह अंतर सही पाया जाता है तो यह निर्धारित सीमा से कहीं अधिक विज्ञापन क्षेत्रफल के इस्तेमाल का मामला होगा। ऐसे में यह भी जांचना जरूरी है कि अतिरिक्त क्षेत्रफल से अर्जित विज्ञापन आय का निर्धारित हिस्सा नोएडा प्राधिकरण को मिला या नहीं।

लापरवाही या मिलीभगत? सरकारी राजस्व की कीमत पर निजी कमाई का सवाल

पूरे प्रकरण में सबसे गंभीर सवाल प्राधिकरण की कथित लापरवाही और संभावित मिलीभगत को लेकर उठ रहे हैं। यदि अनुबंध में निर्धारित क्षेत्रफल से दोगुने से अधिक क्षेत्र में विज्ञापन लंबे समय तक प्रदर्शित होते रहे और संबंधित विभाग के स्तर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह महज निगरानी में चूक है या फिर किसी स्तर पर मिलीभगत, इसकी जांच जरूरी हो जाती है।

आशंका यह भी है कि नियमों की अनदेखी और अतिरिक्त विज्ञापन क्षेत्रफल के इस्तेमाल के चलते सरकारी राजस्व को करोड़ों रुपये का संभावित नुकसान हुआ हो, जबकि इसका आर्थिक लाभ निजी तौर पर संबंधित कंपनी को मिलता रहा हो। हालांकि वास्तविक नुकसान और किसी अधिकारी अथवा कंपनी की जिम्मेदारी का निर्धारण विस्तृत वित्तीय एवं तकनीकी जांच के बाद ही हो सकेगा।

अनुबंध खत्म होने के बाद भी गतिविधियां कैसे जारी?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि 27 जनवरी 2026 को अनुबंध समाप्त होने के बाद भी चिनार इम्पेक्स से जुड़ी विज्ञापन गतिविधियां किस आधार पर जारी हैं। यदि अनुबंध समाप्त होने के बाद कोई विस्तार, अनुमति या वैकल्पिक व्यवस्था की गई है तो उसके दस्तावेज, सक्षम अधिकारी की स्वीकृति और वैधानिक आधार भी सामने आना चाहिए।

यदि ऐसी कोई अनुमति नहीं है तो अनुबंध समाप्त होने के बाद भी व्यावसायिक गतिविधियां जारी रहने देना प्राधिकरण के संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

दस साल के राजस्व का खुलेगा हिसाब तो सामने आएगी पूरी तस्वीर

मामले में वर्ष 2015-16 से वर्तमान तक चिनार इम्पेक्स से जुड़े विज्ञापन राजस्व, लाइसेंस फीस, अन्य शुल्क और प्राधिकरण को किए गए भुगतानों का स्वतंत्र वित्तीय ऑडिट कराया जाना जरूरी है।

इसके साथ ही फुटओवर ब्रिज पर वर्तमान और पिछले वर्षों में लगाए गए विज्ञापनों का क्षेत्रफल, विज्ञापनदाताओं की संख्या, उनसे प्राप्त रकम और प्राधिकरण को जमा कराई गई धनराशि का मिलान किया जाना चाहिए। इससे पता चल सकेगा कि अनुबंध की शर्तों के अनुसार सरकारी खजाने में कितना राजस्व आना था और वास्तव में कितना जमा हुआ।

मुख्यमंत्री पोर्टल तक पहुंचा मामला, फिर भी प्राधिकरण खामोश

मामले को लेकर मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई गई थी, लेकिन इसके बावजूद नोएडा प्राधिकरण की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं होने की बात सामने आ रही है। शिकायत के बाद भी न तो कथित अनियमितताओं का स्पष्ट भौतिक सत्यापन सामने आया और न ही अनुबंध समाप्त होने के बाद जारी विज्ञापन गतिविधियों को लेकर कोई प्रभावी कार्रवाई दिखाई दी।

ऐसे में सवाल यह है कि जब मामला मुख्यमंत्री पोर्टल तक पहुंच चुका था तो प्राधिकरण के संबंधित अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण, विज्ञापन क्षेत्रफल की पैमाइश और पिछले वर्षों के राजस्व का ऑडिट क्यों नहीं कराया।

जांच हुई तो सामने आ सकता है करोड़ों के खेल का सच

अब पूरे प्रकरण में चिनार इम्पेक्स के अनुबंध, विज्ञापन अनुमति, वास्तविक विज्ञापन क्षेत्रफल, पिछले दस वर्षों के राजस्व और 27 जनवरी 2026 के बाद जारी गतिविधियों की निष्पक्ष जांच की जरूरत है।

यदि जांच में निर्धारित सीमा से अधिक विज्ञापन, सरकारी राजस्व की क्षति या अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन सामने आता है तो केवल संबंधित कंपनी ही नहीं, बल्कि लापरवाही बरतने वाले अथवा किसी स्तर पर मिलीभगत करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी तय की जानी चाहिए। सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाकर किसी निजी संस्था को आर्थिक लाभ मिलने की स्थिति में राजस्व की वसूली के साथ-साथ जिम्मेदार लोगों पर भी नियमानुसार कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

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Author: आज का मुद्दा डिजिटल डेस्क

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