जेन जी के 'कॉकरोच पार्टी' जैसे डिजिटल आंदोलनों को अक्सर स्थापित व्यवस्था और विशेष रूप से केंद्र सरकार के खिलाफ युवा आक्रोश के रूप में पेश किया जाता है। इंटरनेट पर एक आभासी समूह बनाकर अपनी निराशा व्यक्त करना इस पीढ़ी का तरीका हो सकता है, लेकिन गहराई से विश्लेषण करने पर यह स्पष्ट होता है कि इस पीढ़ी की केंद्र सरकार से यह नाराजगी जमीनी हकीकत पर आधारित नहीं है और न ही वाजिब है।
युवाओं में अपने भविष्य, आर्थिक स्थिरता और रोजगार को लेकर जो चिंता या एंग्जायटी है, वह केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक वैश्विक संकट है। कोविड-19 महामारी के बाद की दुनिया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कारण तेजी से बदलता जॉब मार्केट, वैश्विक मंदी और युद्धों ने पूरी दुनिया के युवाओं को प्रभावित किया है। अमेरिका से लेकर यूरोप तक हर जगह युवा इस अस्थिरता का सामना कर रहे हैं। इन वैश्विक चुनौतियों और तकनीकी बदलावों का ठीकरा सीधे भारत की केंद्र सरकार पर फोड़ना स्थिति का अति-सरलीकरण और एकतरफा नजरिया है।
वास्तविकता यह है कि भारत की केंद्र सरकार ने जेन जी की बदलती प्राथमिकताओं और आकांक्षाओं को समझते हुए कई ठोस कदम उठाए हैं। दशकों पुरानी शिक्षा व्यवस्था को बदलकर 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति' 2020 लागू की गई है, जो रटने के बजाय कौशल विकास और रचनात्मकता पर जोर देती है। इस पीढ़ी को केवल कॉरपोरेट नौकरियों का मोहताज न रहना पड़े, इसके लिए'स्टार्टअप इंडिया' और 'मुद्रा योजना' ने एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार किया है। इसी का परिणाम है कि आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप हब है और टियर-2 तथा टियर-3 शहरों के युवा भी सफल आंत्रप्रेन्योर बन रहे हैं।इसके अतिरिक्त, डिजिटल इंडिया और सस्ते डेटा की क्रांति ने जेन जी को वह हथियार दिया है जिससे उन्होंने अपनी एक अलग इकॉनमी (क्रिएटर इकॉनमी) खड़ी कर ली है। केंद्र सरकार ने इस नई अर्थव्यवस्था को नजरअंदाज करने के बजाय 'नेशनल क्रिएटर्स अवार्ड' जैसे मंचों के जरिए उनके काम को मुख्यधारा का सम्मान दिया है। यह इस बात का प्रमाण है कि सरकार उनके नए करियर विकल्पों और डिजिटल अस्तित्व का पूरा सम्मान करती है।
कॉकरोच पार्टी जैसे इंटरनेट ट्रेंड्स मूलतः डार्क ह्यूमर का हिस्सा हैं, जिन्हें कई बार निहित राजनीतिक स्वार्थों द्वारा भड़काकर जानबूझकर सरकार विरोधी नैरेटिव में बदल दिया जाता है। इंटरनेट की इस गढ़ी हुई नकारात्मकता के बीच यह भूल जाना आसान है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है।लोकतंत्र में असहमति और सवाल पूछना युवाओं का अधिकार है, लेकिन वह अंधविरोध या इंटरनेट के प्रोपेगैंडा पर आधारित नहीं होना चाहिए। केंद्र सरकार की नीतियां युवाओं को सशक्त बनाने और उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने पर केंद्रित हैं।
कॉकरोच पार्टी की आभासी निराशा में उलझकर सरकार के प्रति अकारण नाराजगी पालने के बजाय, इस पीढ़ी के लिए यह अधिक तार्किक होगा कि वे देश में उपलब्ध हो रहे इन अभूतपूर्व अवसरों का लाभ उठाएं और नए भारत के निर्माण में अपना योगदान दें।
आलोक द्विवेदी
लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं