Noida समय पर इलाज और सावधानी से बचेगी हंता वायरस से जान
Noida। नोएडा। हंता वायरस को हल्के में लेना खतरनाक साबित हो सकता है। यदि किसी व्यक्ति को चूहों के संपर्क में आने के बाद तेज बुखार, सांस लेने में दिक्कत या लगातार खांसी जैसी परेशानी हो तो तुरंत चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए।
हंता वायरस को हल्के में लेना खतरनाक साबित हो सकता है
Noida हंता वायरस को हल्के में लेना खतरनाक साबित हो सकता है। यदि किसी व्यक्ति को चूहों के संपर्क में आने के बाद तेज बुखार, सांस लेने में दिक्कत या लगातार खांसी जैसी परेशानी हो तो तुरंत चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए। साफ-सफाई, जागरूकता और समय पर इलाज ही इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। यह जानकारी डॉ. अंशुमाला सिन्हा ने दी।
उन्होंने बताया कि हंता वायरस एक दुर्लभ लेकिन बेहद खतरनाक वायरल संक्रमण है, जो मुख्य रूप से संक्रमित चूहों के संपर्क में आने से फैलता है। यह वायरस इंसानों में गंभीर फेफड़ों और किडनी संबंधी बीमारियां पैदा कर सकता है। बदलती जीवनशैली, गंदगी और चूहों की बढ़ती संख्या के कारण स्वास्थ्य एजेंसियां लगातार सतर्कता बरतने की सलाह दे रही हैं।
डॉ. सिन्हा के अनुसार हंता वायरस कई प्रकार के वायरसों का समूह है, जो मुख्य रूप से जंगली चूहों में पाया जाता है। संक्रमित चूहों के मल, मूत्र और लार के सूक्ष्म कण हवा में मिलकर इंसानों तक पहुंचते हैं। इन्हें सांस के जरिए शरीर में लेने पर संक्रमण फैल सकता है। यह वायरस पहली बार 1950 के दशक में कोरिया के हंतान नदी क्षेत्र में पहचाना गया था, जिसके नाम पर इसका नाम हंता वायरस पड़ा।
उन्होंने बताया कि हंता वायरस संक्रमण के शुरुआती लक्षण सामान्य फ्लू जैसे होते हैं। इनमें तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर और मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी, ठंड लगना, उल्टी, मतली और पेट दर्द शामिल हैं। संक्रमण बढ़ने पर मरीज को सांस लेने में दिक्कत, सीने में जकड़न, खांसी और फेफड़ों में पानी भरने जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। वहींएचएफआरएस प्रकार में किडनी प्रभावित होने के कारण पेशाब कम होना, ब्लड प्रेशर गिरना और आंतरिक रक्तस्राव के लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार शुरुआती लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। गंभीर स्थिति में मरीज के फेफड़ों में पानी भर सकता है और किडनी फेल होने का खतरा भी रहता है। फिलहाल हंता वायरस का कोई विशेष एंटीवायरल इलाज या वैक्सीन व्यापक स्तर पर उपलब्ध नहीं है। डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार सहायक उपचार देते हैं, जिसमें ऑक्सीजन सपोर्ट, आईसीयू में निगरानी, तरल पदार्थों का संतुलन और गंभीर मामलों में वेंटिलेटर का उपयोग शामिल है। समय रहते अस्पताल पहुंचना मरीज की जान बचाने में अहम भूमिका निभाता है।
विश्व स्वास्थ्य एजेंसियों के अनुसार हंता वायरस में मृत्यु दर लगभग 35 प्रतिशत तक दर्ज की गई है। एशियाई देशों चीन और दक्षिण कोरिया में हर साल हजारों मामले सामने आते हैं। भारत में इसके मामले बेहद कम दर्ज किए गए हैं, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि जागरूकता की कमी और जांच सुविधाओं के अभाव में कई मामले सामने नहीं आ पाते।
संक्रमण के शुरुआती लक्षण
तेज बुखार
सिर दर्द
शरीर और मांसपेशियों में दर्द
उल्टी और कमजोरी
पेट दर्द
सांस लेने में दिक्कत
लगातार खांसी
बचाव और रोकथाम
घर और गोदामों को साफ रखें
चूहों की संख्या नियंत्रित करें
चूहों के मल-मूत्र को सीधे हाथ से न छुएं
सफाई करते समय मास्क और दस्ताने पहनें
बंद कमरों को खोलकर पहले हवा आने दें
भोजन को ढंककर रखें
खेतों और स्टोर रूम में विशेष सतर्कता बरतें
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