महाराष्ट्र के पुणे से सामने आए एक चर्चित हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर दिया है। जिस रिश्ते कोविश्वास और जीवनभर के साथ का आधार माना जाता है उसी रिश्ते के भीतर कथित साजिश और हत्याकी कहानी ने समाज को कई कठिन सवालों के सामने खड़ा कर दिया है। एक ओर शादी की तैयारियांचल रही थीं। करोड़ों रुपये खर्च कर भव्य आयोजन की योजनाएं बनाई जा रही थीं। दूसरी ओर रिश्तों कीसतह के नीचे अविश्वास और दूसरे संबंधों का ऐसा जाल बुना जा रहा था जिसने अंततः एक युवाकारोबारी की जान ले ली।
पुलिस जांच के अनुसार मंगेतर और उसके कथित प्रेमी पर युवक की हत्या की साजिश रचने का आरोपहै। मामला केवल एक आपराधिक घटना भर नहीं है बल्कि यह बदलते सामाजिक परिवेश में रिश्तों कीगंभीर चुनौतियों को भी उजागर करता है। आज समाज का बड़ा वर्ग इस घटना को केवल हत्या के रूप
में नहीं बल्कि भरोसे की हत्या के रूप में देख रहा है।भारतीय समाज में विवाह को केवल दो व्यक्तियों का नहीं बल्कि दो परिवारों का मिलन माना जाता है।
विवाह से पहले होने वाली सगाई और अन्य रस्में भविष्य के जीवन की नींव मानी जाती हैं। ऐसे में यदिकोई व्यक्ति किसी रिश्ते को स्वीकार नहीं करना चाहता तो उसके पास उसे स्पष्ट रूप से अस्वीकारकरने का अधिकार है।
आधुनिक समाज में व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अपनी पसंद के अनुसार जीवनसाथीचुनने का अधिकार भी स्वीकार किया जाता है। लेकिन किसी रिश्ते से बाहर निकलने का रास्ता छल औरहिंसा नहीं हो सकता।