विरेश तिवारी — जनतंत्र एवं स्तंभकार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले विधान परिषद की 11 सीटों पर होने वाले चुनाव ने प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की इन सीटों पर भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी की तैयारियां तेज हैं। भाजपा पांच सीटों पर अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर चुकी है, लेकिन छह सीटों पर अभी भी फैसला अटका हुआ है। ऐसे में टिकट के दावेदारों की सक्रियता लखनऊ से दिल्ली तक बढ़ गई है।आज सामने आई रिपोर्ट के अनुसार भाजपा के भीतर बाकी छह सीटों को लेकर मंथन जारी है और अगले सप्ताह उम्मीदवारों के नाम घोषित किए जाने की संभावना है। पार्टी की पिछली कोर कमेटी की बैठक में भी इन सीटों पर चर्चा हुई थी, लेकिन सभी नामों पर सहमति नहीं बन सकी।
पांच सीटों पर पुराने चेहरों पर भरोसा
भाजपा ने जिन पांच सीटों पर उम्मीदवार घोषित किए हैं, उनमें अधिकतर मौजूदा विधान परिषद सदस्यों को ही दोबारा मौका दिया गया है।लखनऊ स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से इंजीनियर अवनीश कुमार सिंह, आगरा स्नातक से डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह, बरेलीमुरादाबाद शिक्षक से डॉ. हरि सिंह ढिल्लो, लखनऊ शिक्षक से उमेश द्विवेदी और मेरठ शिक्षक से श्रीचंद शर्मा को उम्मीदवार बनाया गया है।इन पांच नामों की घोषणा के साथ भाजपा ने कम से कम पांच सीटों पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। अब राजनीतिक नजरें उन छह सीटों पर टिक गई हैं जहां पार्टी को नए या संभावित चेहरों में से चयन करना है।

किन छह सीटों पर है असली पेंच?
मौजूदा जानकारी के अनुसार दिसंबर में शिक्षक और स्नातक कोटे की कुल 11 सीटें रिक्त होनी हैं। इनमें छह सीटों पर भाजपा, तीन पर सपा तथा दो सीटों पर निर्दलीय सदस्य हैं।यही वजह है कि भाजपा के सामने इन छह सीटों को लेकर केवल उम्मीदवार चुनने की चुनौती नहीं है, बल्कि राजनीतिक समीकरण साधने की भी चुनौती है।आज की रिपोर्ट में खास तौर पर शिक्षक संगठनों से जुड़े कुछ प्रभावशाली चेहरों की सक्रियता का उल्लेख है। एक प्रमुख शिक्षक संगठन के मुखिया भाजपा का समर्थन हासिल करना चाहते हैं, जबकि उनके संगठन के कई उम्मीदवार दूसरी सीटों पर भाजपा के खिलाफ चुनावी मैदान में सक्रिय हैं। इस विरोधाभास ने भाजपा नेतृत्व के सामने मुश्किल स्थिति पैदा कर दी है।
झांसी-इलाहाबाद स्नातक सीट पर भी निगाह
सबसे दिलचस्प राजनीतिक गतिविधियों में झांसी-इलाहाबाद स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का नाम सामने आ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक एक शिक्षक गुट के मुखिया इस सीट से भाजपा का समर्थन चाहते हैं। लेकिन दूसरी ओर उनके संगठन के कुछ उम्मीदवार अन्य सीटों पर भाजपा के खिलाफ मैदान में हैं।यही विरोधाभास भाजपा के लिए निर्णय को कठिन बना रहा है। पार्टी यदि किसी प्रभावशाली शिक्षक नेता को समर्थन देती है तो उसे संबंधित संगठन के दूसरे उम्मीदवारों के साथ अपने संबंधों का भी हिसाब रखना होगा।
शिक्षक नेताओं की भाजपा में एंट्री की चर्चा
इस चुनाव की एक और दिलचस्प राजनीतिक कहानी कुछ मौजूदा शिक्षक एमएलसी और नेताओं के भाजपा के साथ आने की संभावनाओं को लेकर है।आज की रिपोर्ट के मुताबिक एक शिक्षक एमएलसी भाजपा के साथ आने के लिए लखनऊ से दिल्ली तक सक्रिय हैं। दिल्ली में उन्होंने केंद्रीय स्तर के एक नेता से संपर्क भी साधा है, लेकिन प्रदेश संगठन में उनके नाम को लेकर अभी पूरी सहमति नहीं बन पाई है।दूसरी तरफ कुछ दावेदारों ने संबंधित नेता से जुड़ी शिक्षण संस्थाओं के दस्तावेज तक पार्टी नेतृत्व के सामने पहुंचाए हैं। इससे साफ है कि टिकट की लड़ाई केवल राजनीतिक संपर्क तक सीमित नहीं है, बल्कि दावेदार एक-दूसरे की राजनीतिक और सामाजिक पृष्ठभूमि भी सामने रखने में जुटे हैं।
भाजपा के लिए छह सीटों का फैसला आसान नहीं
भाजपा ने पहली सूची में पुराने चेहरों पर भरोसा करके एक स्पष्ट संकेत दिया है कि जहां पार्टी के मौजूदा एमएलसी का प्रदर्शन और संगठनात्मक पकड़ संतोषजनक है, वहां जोखिम लेने से बचा जा रहा है।लेकिन बाकी छह सीटों पर स्थिति अलग है। यहां पार्टी को यह तय करना है कि पुराने चेहरों को दोबारा मौका दिया जाए, नए संगठनात्मक कार्यकर्ताओं को आगे लाया जाए या फिर ऐसे प्रभावशाली शिक्षक नेताओं को साथ लिया जाए जिनका अपने निर्वाचन क्षेत्र में व्यक्तिगत आधार मजबूत है।यह फैसला 2027 के विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सपा पहले ही चला चुकी है अपना दांव
भाजपा के लिए चुनौती इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि समाजवादी पार्टी इन चुनावों को लेकर पहले ही सक्रिय हो चुकी है और रिक्त होने वाले क्षेत्रों में अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर चुकी है। भाजपा की पहली सूची के बाद दोनों दलों के बीच चुनावी मुकाबले की तस्वीर बनने लगी है।खास तौर पर लखनऊ स्नातक सीट पर मुकाबला रोचक हो सकता है। भाजपा ने जहां मौजूदा एमएलसी अवनीश कुमार सिंह को दोबारा मैदान में उतारा है, वहीं सपा ने कांति सिंह को उम्मीदवार बनाया है। पिछले चुनाव में अवनीश कुमार सिंह ने निर्दलीय उम्मीदवार कांति सिंह को हराया था। अब वही मुकाबला नए राजनीतिक समीकरणों के साथ सामने आ सकता है।

2027 से पहले ‘मिनी टेस्ट’ क्यों?
इन चुनावों को केवल विधान परिषद की 11 सीटों का चुनाव मानना राजनीतिक रूप से सही नहीं होगा। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। ऐसे में शिक्षक और स्नातक वर्ग के बीच राजनीतिक दलों की पकड़ का यह महत्वपूर्ण परीक्षण होगा।शिक्षक और स्नातक मतदाता सामान्य विधानसभा चुनाव के मतदाताओं से अलग होते हैं। इन वर्गों में शिक्षा, रोजगार, नियुक्तियां, सरकारी नीतियां, शिक्षकों की समस्याएं और युवाओं के मुद्दे राजनीतिक चर्चा के केंद्र में रहते हैं।
इसलिए उम्मीदवार का व्यक्तिगत संपर्क, उसकी छवि और संबंधित वर्ग के बीच वर्षों की सक्रियता भी चुनाव परिणाम पर प्रभाव डाल सकती है।
भाजपा नेतृत्व के सामने दोहरी चुनौती
भाजपा के सामने फिलहाल दोहरी चुनौती है। पहला—छह सीटों के लिए मजबूत उम्मीदवार चुनना और दूसरा—टिकट न मिलने वाले दावेदारों तथा उनके समर्थकों को नाराज होने से रोकना।शिक्षक और स्नातक चुनावों में स्थानीय संगठन और व्यक्तिगत नेटवर्क की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। यदि किसी मजबूत दावेदार को टिकट नहीं मिलता है तो उसके निर्दलीय उतरने या दूसरे उम्मीदवार का समर्थन करने की संभावना भी पार्टी के समीकरण को प्रभावित कर सकती है।इसी कारण इस बार भाजपा टिकट वितरण में राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश कर रही है।
अगले सप्ताह सामने आ सकती है पूरी तस्वीर
आज की स्थिति में भाजपा ने पांच नाम घोषित किए हैं और छह सीटों पर फैसला बाकी है। पार्टी नेतृत्व के स्तर पर मंथन जारी है और अगले सप्ताह बाकी नामों की घोषणा की संभावना जताई गई है।इन छह नामों की घोषणा के बाद ही यह साफ होगा कि भाजपा ने पुराने चेहरों पर कितना भरोसा किया, किन नए चेहरों को मौका दिया और किन प्रभावशाली शिक्षक नेताओं को अपने साथ जोड़ा।फिलहाल इतना तय है कि उत्तर प्रदेश में एमएलसी चुनाव ने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियों को नई गति दे दी है। लखनऊ से दिल्ली तक चल रही टिकट की दौड़ और शिक्षक संगठनों के बदलते समीकरण आने वाले दिनों में इस चुनाव को और दिलचस्प बना सकते हैं।
निष्कर्ष यही है कि पांच नाम घोषित हो चुके हैं, लेकिन असली राजनीतिक रोमांच अभी बाकी छह सीटों पर है।