नई दिल्ली, भीम आर्मी के प्रमुख एवं सांसद चंद्रशेखर आजाद बुधवार को जंतर-मंतर पहुंचे और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन कोसमर्थन दिया। इस दौरान उन्होंने आंदोलनकारियों को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार परनिशाना साधा और कहा कि युवाओं की मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उन्होंने सोनमवांगचुक से मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता व्यक्त की।सोनम वांगचुक पिछले 17 दिनों से कथित परीक्षा अनियमितताओं और युवाओं के लिए पारदर्शीपरीक्षा व्यवस्था की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।
इस आंदोलन में बड़ी संख्या में युवा भी शामिल हैं। चंद्रशेखर आजाद ने आंदोलन स्थल पर पहुंचकरप्रदर्शनकारियों के प्रति एकजुटता व्यक्त की और कहा कि युवाओं की आवाज को लोकतांत्रिकतरीके से सुना जाना चाहिए।अपने संबोधन में चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि लंबे समय से आंदोलन और भूख हड़ताल केबावजूद यदि सरकार संवाद के लिए आगे नहीं आती, तो यह चिंता का विषय है। उन्होंने कहाकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनभावनाओं और शांतिपूर्ण आंदोलनों को महत्व दिया जाना चाहिए।चंद्रशेखर आजाद ने यह भी कहा कि यदि उनके पास समय होता तो वह स्वयं भीआंदोलनकारियों के साथ धरने पर बैठते। उन्होंने दावा किया कि यदि वह लंबे समय तकआंदोलन में शामिल होते तो बड़ी संख्या में लोग उनके समर्थन में जंतर-मंतर पहुंच जाते।
उन्होंने सरकार से युवाओं की मांगों पर गंभीरता से विचार करने और शीघ्र समाधान निकालने की अपील की।उन्होंने वर्षा के बीच धरने पर बैठे युवाओं की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि छात्रोंका इस प्रकार कठिन परिस्थितियों में आंदोलन करना पीड़ादायक है। उनका कहना था किसरकार को संवाद स्थापित कर उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल करनी चाहिए।बताया गया कि आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संगठन ने विभिन्न राजनीतिक दलों से भी समर्थन
की अपील की है। इसी क्रम में चंद्रशेखर आजाद को भी आंदोलन में शामिल होने का निमंत्रणदिया गया था, जिसके बाद वह जंतर-मंतर पहुंचे और अपना समर्थन व्यक्त किया।उल्लेखनीय है कि सोनम वांगचुक की लगातार जारी भूख हड़ताल को लेकर विभिन्न सामाजिक,धार्मिक और राजनीतिक हस्तियां चिंता जता चुकी हैं।
कई नेताओं और सार्वजनिक जीवन से जुड़ेव्यक्तियों ने उनसे स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए अनशन समाप्त करने का आग्रह भी कियाहै, जबकि आंदोलनकारी अपनी मांगों पर निर्णय होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं।