रूपिंदर बरार
By दिनेश कुमार गौड़
‘कोरल ब्लूम अगेन’ रुपिंदर बरार द्वारा अंग्रेजी में लिखा गया एक ऐसा महत्वपूर्ण उपन्यास है जो समुद्री जीव-जगत, समुद्र तटों पर रहने वाले समुदायों और प्रकृति पर निर्भर उनके जीवन की संवेदनशील तस्वीर प्रस्तुत करता है। इस उपन्यास में केवल समुद्री जीवन की कहानी नहीं, बल्कि प्रकृति और मनुष्य के बीच सदियों से चले आ रहे उस संबंध को रेखांकित करती है, जिसमें समुद्र, उसके जीव और तटीय समाज एक-दूसरे के पूरक रहे हैं।
समुद्री तटों पर रहने वाले लोगों का जीवन लंबे समय से समुद्र और उसके प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर रहा है। लेकिन बदलते समय में बढ़ती व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा, अनियंत्रित मानवीय गतिविधियों और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन ने समुद्री जीव-जगत तथा उससे जुड़े समुदायों के अस्तित्व के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। ‘कोरल ब्लूम अगेन’ इन्हीं चुनौतियों के बीच प्रकृति के संरक्षण और उसके पुनर्जीवन की उम्मीद जगाती है।इस पुस्तक की विशेषता यह है कि इसमें पर्यावरण संरक्षण को केवल एक विषय के रूप में नहीं, बल्कि मानवीय जीवन और संवेदनाओं से जोड़कर देखा गया है। समुद्र और उसके कोरल, समुद्री जीव तथा उनसे जुड़े लोगों का जीवन हमें यह संदेश देता है कि प्रकृति का संरक्षण केवल पर्यावरण की रक्षा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की सुरक्षा भी है।

इस महत्वपूर्ण विषय को संवेदनशीलता और रचनात्मक दृष्टि से प्रस्तुत किया है डॉ. रूपिंदर बरार ने। भारतीय राजस्व सेवा से जुड़ी डॉ. बरार ने प्रशासनिक दायित्वों के साथ पर्यटन क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किया है। पर्यटन मंत्रालय में अतिरिक्त महानिदेशक के रूप में उन्होंने भारत की पर्यटन विरासत और संभावनाओं को देश-दुनिया तक पहुंचाने वाली ‘अतुल्य भारत’ तथा ‘आओ देखें अपना देश’ जैसी महत्वपूर्ण पहलों से जुड़कर कार्य किया।वर्तमान में डॉ. रूपिंदर बरार भारत सरकार के कोयला मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के रूप में कार्यरत हैं। प्रशासनिक अनुभव, पर्यटन के प्रति उनकी समझ और प्रकृति एवं समाज के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण का प्रभाव ‘कोरल ब्लूम अगेन’ की विषयवस्तु में दिखाई देता है।
यह पुस्तक हमें यह सोचने के लिए प्रेरित करती है कि विकास और व्यावसायिक प्रगति आवश्यक हैं, लेकिन उनका रास्ता प्रकृति के विनाश से होकर नहीं गुजरना चाहिए। समुद्र यदि जीवन देता है तो उसकी रक्षा करना भी हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।‘कोरल ब्लूम अगेन’ का मूल संदेश उम्मीद का है—यदि मनुष्य प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर चले, तो नष्ट होती जैव-विविधता फिर से खिल सकती है और समुद्र के कोरल फिर से जीवन और रंगों से भर सकते हैं।