भारत की आवाज • सच के साथ
Updated: 03 November 2026 | Hindi News Portal
मुद्दा
आज का मुद्दा
नजर आपकी खबर आपकी
ब्रेकिंग
61वें जन्मदिन पर मन्नत की बालकनी में पहुंचे शाहरुख, फैंस को दिया खास तोहफा अनूपशहर में त्योहारों को लेकर पुलिस अलर्ट, सीओ ने किया पैदल मार्च इलाहाबाद उच्च न्यायालय की विशेष पहल, अब आपका निर्णय आपकी भाषा में दीपावली पर उज्ज्वला योजना के 3.85 लाख लाभार्थियों को मिलेगा फ्री सिलेंडर आईआईएमटी कॉलेज समूह में दो दिवसीय ‘इवोल्यूशन-3.0’ का भव्य शुभारंभ, 35 स्कूलों के 2500 विद्यार्थियों ने प्रदर्शित किए वैज्ञानिक मॉडल दादरी में सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ नगर पालिका का अभियान, 5700 रुपये का जुर्माना वसूला गौशाला में गोवंश 3 दिन से भूखे आगामी दीपावली पर्व को दृष्टिगत रखते हुए जनपद का खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग एक्शन में जन-सामान्य की शिकायतों का त्वरित कार्यवाही कर उनकी संतुष्टि के साथ निस्तारण करें अधिकारी: श्रम आयुक्त चोटपुर कॉलोनी में भव्य हिंदू चौपाल का आयोजन, स्वामी दीपांकर जी महाराज ने दिया हिंदू एकता एवं सामाजिक समरसता का संदेश
आज का मुद्दा पर प्रकाशित खबरों में स्थानीय संदर्भ, सत्यापन और पाठकों के काम की जानकारी को प्राथमिकता दी जाती है।
Artical

‘कोरल ब्लूम अगेन’ : प्रकृति, समुद्री जीवन और मानवीय संवेदना की कहानी

‘कोरल ब्लूम अगेन’ रुपिंदर बरार द्वारा अंग्रेजी में लिखा गया एक ऐसा महत्वपूर्ण उपन्यास है जो समुद्री जीव-जगत, समुद्र तटों पर रहने वाले समुदायों और प्रकृति पर निर्भर उनके जीवन की संवेदनशील तस्वीर प्रस्तुत करता है।

आज का मुद्दा डिजिटल डेस्क | Updated: 24 Sep 2026, 05:15 PM | Views: 0 | 2 मिनट पढ़ें
‘कोरल ब्लूम अगेन’ : प्रकृति, समुद्री जीवन और मानवीय संवेदना की कहानी

रूपिंदर बरार 
By दिनेश कुमार गौड़ 
‘कोरल ब्लूम अगेन’ रुपिंदर बरार द्वारा अंग्रेजी में लिखा गया एक ऐसा महत्वपूर्ण उपन्यास है जो समुद्री जीव-जगत, समुद्र तटों पर रहने वाले समुदायों और प्रकृति पर निर्भर उनके जीवन की संवेदनशील तस्वीर प्रस्तुत करता है। इस उपन्यास में केवल समुद्री जीवन की कहानी नहीं, बल्कि प्रकृति और मनुष्य के बीच सदियों से चले आ रहे उस संबंध को रेखांकित करती है, जिसमें समुद्र, उसके जीव और तटीय समाज एक-दूसरे के पूरक रहे हैं।

समुद्री तटों पर रहने वाले लोगों का जीवन लंबे समय से समुद्र और उसके प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर रहा है। लेकिन बदलते समय में बढ़ती व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा, अनियंत्रित मानवीय गतिविधियों और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन ने समुद्री जीव-जगत तथा उससे जुड़े समुदायों के अस्तित्व के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। ‘कोरल ब्लूम अगेन’ इन्हीं चुनौतियों के बीच प्रकृति के संरक्षण और उसके पुनर्जीवन की उम्मीद जगाती है।इस पुस्तक की विशेषता यह है कि इसमें पर्यावरण संरक्षण को केवल एक विषय के रूप में नहीं, बल्कि मानवीय जीवन और संवेदनाओं से जोड़कर देखा गया है। समुद्र और उसके कोरल, समुद्री जीव तथा उनसे जुड़े लोगों का जीवन हमें यह संदेश देता है कि प्रकृति का संरक्षण केवल पर्यावरण की रक्षा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की सुरक्षा भी है।

इस महत्वपूर्ण विषय को संवेदनशीलता और रचनात्मक दृष्टि से प्रस्तुत किया है डॉ. रूपिंदर बरार ने। भारतीय राजस्व सेवा से जुड़ी डॉ. बरार ने प्रशासनिक दायित्वों के साथ पर्यटन क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किया है। पर्यटन मंत्रालय में अतिरिक्त महानिदेशक के रूप में उन्होंने भारत की पर्यटन विरासत और संभावनाओं को देश-दुनिया तक पहुंचाने वाली ‘अतुल्य भारत’ तथा ‘आओ देखें अपना देश’ जैसी महत्वपूर्ण पहलों से जुड़कर कार्य किया।वर्तमान में डॉ. रूपिंदर बरार भारत सरकार के कोयला मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के रूप में कार्यरत हैं। प्रशासनिक अनुभव, पर्यटन के प्रति उनकी समझ और प्रकृति एवं समाज के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण का प्रभाव ‘कोरल ब्लूम अगेन’ की विषयवस्तु में दिखाई देता है।

यह पुस्तक हमें यह सोचने के लिए प्रेरित करती है कि विकास और व्यावसायिक प्रगति आवश्यक हैं, लेकिन उनका रास्ता प्रकृति के विनाश से होकर नहीं गुजरना चाहिए। समुद्र यदि जीवन देता है तो उसकी रक्षा करना भी हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।‘कोरल ब्लूम अगेन’ का मूल संदेश उम्मीद का है—यदि मनुष्य प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर चले, तो नष्ट होती जैव-विविधता फिर से खिल सकती है और समुद्र के कोरल फिर से जीवन और रंगों से भर सकते हैं।

आज का मुद्दा Hindi News Breaking News Artical

Author: आज का मुद्दा डिजिटल डेस्क

आज का मुद्दा जनता से जुड़े मुद्दों, स्थानीय खबरों और देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को प्रमुखता से प्रकाशित करता है।

संबंधित खबरें