वाणिज्य कर विभाग, गौतम बुद्ध नगर द्वारा सेक्टर 148, Noida में एक महत्वपूर्ण 'व्यापार संवाद कार्यक्रम' का आयोजन
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य स्थानीय व्यापारियों और उद्यमियों के साथ समन्वय स्थापित करना तथा आगामी 15 जून से ई-वे बिल (E-Way Bill) प्रणाली में होने वाले बड़े बदलावों से उन्हें अवगत कराना था।
'व्यापार संवाद कार्यक्रम' का आयोजन
नोएडा, वाणिज्य कर विभाग, गौतम बुद्ध नगर द्वारा सेक्टर 148, नोएडा में एक महत्वपूर्ण 'व्यापार संवाद कार्यक्रम' का आयोजन किया गया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य स्थानीय व्यापारियों और उद्यमियों के साथ समन्वय स्थापित करना तथा आगामी 15 जून से ई-वे बिल (E-Way Bill) प्रणाली में होने वाले बड़े बदलावों से उन्हें अवगत कराना था। हालांकि, विभाग की इस कवायद का व्यापारियों ने पुरजोर विरोध किया और इसे 'कागजी कार्रवाई का बोझ' करार दिया।
प्रशासनिक अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति
इस महत्वपूर्ण बैठक में वाणिज्य कर विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया, जिनमें मुख्य रूप से शामिल रहे:
योगेश विजय जी (जॉइंट कमिश्नर)
के. के. राय जी (जॉइंट कमिश्नर, एसआईबी - SIB)
दिनेश पाल जी (जॉइंट कमिश्नर, रेंज बी)
अनिल कुमार जी (जॉइंट कमिश्नर, कॉरपोरेट)
राकेश वर्मा जी (असिस्टेंट कमिश्नर ग्रेड-2)
15 जून से क्या बदल रहा है? (विभाग का पक्ष)
कार्यक्रम में जॉइंट कमिश्नर योगेश विजय ने ई-वे बिल में होने वाले आगामी संशोधनों को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि:
थर्ड पार्टी जीएसटी अनिवार्य: अब से यदि कोई व्यापारी किसी थर्ड पार्टी (तीसरे पक्ष) को माल भेजता है, तो ई-वे बिल में उस थर्ड पार्टी का जीएसटी (GST) विवरण डालना अनिवार्य होगा। ई-वे बिल क्लोजर: माल गंतव्य स्थान पर पहुंचने के बाद, व्यापारियों को ई-वे बिल को अनिवार्य रूप से क्लोज (बंद) करना होगा।अधिकारियों का तर्क: इन बदलावों से टैक्स चोरी पर लगाम लगेगी, सप्लाई चेन में पारदर्शिता आएगी और फर्जी बिलिंग (Fake Billing) के मामलों को रोकने में मदद मिलेगी।
यापारियों की शंकाएं और अधिकारियों द्वारा समाधान
नियमों की घोषणा के बाद व्यापारियों ने अपने-अपने कार्यक्षेत्र से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं और तकनीकी दिक्कतों को लेकर अधिकारियों के सामने सवालों की झड़ी लगा दी।इस दौरान जॉइंट कमिश्नर (SIB) के. के. राय ने मोर्चा संभाला। उन्होंने सभी व्यापारियों द्वारा उठाए गए एक-एक प्रश्न का अत्यंत विस्तार और धैर्यपूर्वक जवाब दिया। उन्होंने व्यापारियों को आश्वस्त करते हुए समझाया कि इन नियमों का उद्देश्य ईमानदार व्यापारियों को परेशान करना नहीं, बल्कि टैक्स चोरी के लूपहोल्स को बंद करना है। उन्होंने विभाग की ओर से हर संभव तकनीकी सहयोग देने का भी भरोसा दिलाया।
व्यापारियों की चिंताएं और तीखा विरोध
विभाग के इन दावों के विपरीत, उत्तर प्रदेश युवा व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने इस नए नियम को अव्यावहारिक बताते हुए अपनी गंभीर चिंताएं और नाराजगी व्यक्त की:
1. 'कागजी कार्रवाई में उलझ जाएगा छोटा व्यापारी'
उत्तर प्रदेश युवा व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष विकास जैन ने इस बदलाव का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा:
इस नए नियम से छोटा व्यापारी सिर्फ कागजी कार्रवाई में ही उलझ कर रह जाएगा। इससे उसका समय और पैसा दोनों बर्बाद होंगे। अब हर छोटे व्यापारी को हर समय एक अकाउंटेंट रखने की आवश्यकता होगी, जिससे व्यापार की लागत (बिना मतलब का खर्च) काफी बढ़ जाएगी।"
2. दोहरे टैक्स और उत्पीड़न का आरोप
मंडल के प्रदेश चेयरमैन नवनीत गुप्ता ने टैक्स प्रणाली की विसंगतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि हम टैक्स को एक रूप में नहीं ला सकते और एक ही आइटम पर दो अलग-अलग जगह टैक्स लगते हैं, तो इससे व्यापारियों का मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न (हरासमेंट) होता है। उन्होंने विभाग से इसका कोई ठोस और सुदृढ़ इलाज ढूंढने की मांग की।
3. साप्ताहिक बाजारों में जीएसटी चोरी का मुद्दा
प्रदेश महामंत्री और ग्रेटर नोएडा के अध्यक्ष सचिन गोयल ने एक बड़ा मुद्दा उठाते हुए विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। उन्होंने बताया कि:
स्थानीय साप्ताहिक बाजारों में हर सप्ताह लाखों रुपये का माल बिना जीएसटी के धड़ल्ले से बेचा जा रहा है।
इस अवैध कारोबार के कारण बड़े-बड़े शोरूम संचालक और ईमानदार व्यापारी काम करने से कतरा रहे हैं, क्योंकि भारी-भरकम टैक्स और खर्चों के बीच वे इस अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा का सामना नहीं कर पा रहे हैं। सचिन गोयल ने मांग की कि विभाग को कागजी नियम कड़े करने के बजाय, ऐसे अवैध और बिना जीएसटी वाले बाजारों पर विशेष कार्रवाई करनी चाहिए।
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