आज का मुद्दा! सैय्यद मज़हर
बुलंदशहर! गुलावठी! देवनागरी महाविद्यालय आयोजित इस कार्यक्रम के अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. महेंद्र कुमार ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि हिंदी केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, संवेदना, परंपरा और राष्ट्रीय अस्मिता की सशक्त अभिव्यक्ति है। हिंदी ने देश के विभिन्न क्षेत्रों, भाषाओं और संस्कृतियों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि हिंदी को समृद्ध बनाने की जिम्मेदारी केवल साहित्यकारों की नहीं, बल्कि प्रत्येक हिंदीभाषी एवं भारतीय नागरिक की है। नई पीढ़ी को हिंदी के प्रति गौरव का भाव रखते हुए इसके अध्ययन, प्रयोग और प्रचार-प्रसार के लिए आगे आना चाहिए।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में रसायन विज्ञान विभाग की प्रभारी प्रोफेसर विनीता गर्ग उपस्थित रहीं। उन्होंने कहा कि हिंदी भारतीय समाज के जीवन-मूल्यों और सांस्कृतिक चेतना को अभिव्यक्त करने वाली भाषा है। विज्ञान एवं तकनीकी के वर्तमान युग में भी हिंदी की उपयोगिता निरंतर बढ़ रही है। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे हिंदी को केवल एक विषय के रूप में न देखें, बल्कि अपने विचारों और भावनाओं को प्रभावशाली ढंग से व्यक्त करने के माध्यम के रूप में अपनाएं।कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में राजनीति विज्ञान विभाग के प्रभारी डॉ. पुष्पेंद्र कुमार मिश्र उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि हिंदी ने स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर वर्तमान लोकतांत्रिक व्यवस्था तक जन-जागरण और सामाजिक चेतना के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हिंदी जनसामान्य को जोड़ने वाली भाषा है और लोकतांत्रिक मूल्यों को समाज के व्यापक वर्ग तक पहुँचाने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।

कार्यक्रम के विशिष्ट वक्ता पीयूष त्रिपाठी ने हिंदी भाषा के ऐतिहासिक विकास और उसकी व्यापकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिंदी ने समय के साथ अनेक भाषाओं, बोलियों और संस्कृतियों से संवाद स्थापित करते हुए अपने स्वरूप को समृद्ध किया है। उन्होंने कहा कि हिंदी की वास्तविक शक्ति उसकी सहजता, ग्रहणशीलता और जनसामान्य से जुड़े होने में निहित है। उन्होंने विद्यार्थियों से हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग और अध्ययन का आह्वान किया।अर्थशास्त्र विभाग के प्रभारी डॉ. भवनीत सिंह बत्रा ने कहा कि हिंदी का महत्व साहित्य और संस्कृति तक सीमित नहीं है, बल्कि आर्थिक एवं व्यावसायिक क्षेत्र में भी हिंदी की भूमिका निरंतर बढ़ रही है। डिजिटल माध्यमों और आधुनिक तकनीक के विस्तार के साथ हिंदी के प्रयोग के नए अवसर सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि हिंदी को रोजगार और ज्ञान-विज्ञान की भाषा के रूप में विकसित करने की दिशा में सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।
शारीरिक शिक्षा विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर श्री नवीन तोमर ने कहा कि हिंदी हमारी भावनाओं और विचारों को सहजता से अभिव्यक्त करने वाली भाषा है। उन्होंने कहा कि भाषा व्यक्ति के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है तथा विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा एवं हिंदी के प्रति सम्मान का भाव रखना चाहिए।
गणित विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर श्री श्याम प्रकाश ने कहा कि हिंदी दिवस हिंदी भाषा के प्रति अपने दायित्वों को समझने और उसके अधिकाधिक प्रयोग का संकल्प लेने का अवसर है। डॉ. विनय कुमार सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर, रसायन विज्ञान विभाग ने कहा कि हिंदी का विकास तभी संभव है, जब हम अपने दैनिक जीवन, शिक्षा और कार्यक्षेत्र में हिंदी के प्रयोग को प्राथमिकता दें।
कार्यक्रम में बी.ए. तृतीय सेमेस्टर के छात्र नमः चौधरी ने हिंदी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिंदी विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति और समाज से जोड़ने वाली भाषा है। छात्रा खुशी ने हिंदी दिवस पर एक कविता प्रस्तुत की। छात्रा स्नेहा तथा जिया ने हिंदी के महत्व को दर्शाती कविताओं का वाचन किया।
कार्यक्रम का संचालन हिंदी विभाग के प्रभारी डॉ. संदीप कुमार सिंह ने किया। उन्होंने अपने संचालन में हिंदी दिवस की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिंदी को संविधान सभा द्वारा 14 सितंबर, 1949 को संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया गया था। इसी ऐतिहासिक अवसर की स्मृति में प्रत्येक वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है। कार्यक्रम के अंत में हिंदी विभाग के डॉ. हरीश कसाना ने सभी अतिथियों, प्राचार्य, शिक्षकगण एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि हिंदी केवल भाषा नहीं, बल्कि भारतीय समाज की सामूहिक स्मृति, संस्कृति और संवेदना की पहचान है। उन्होंने कहा कि हिंदी की समृद्ध साहित्यिक परंपरा ने समाज को दिशा देने और मानवीय मूल्यों को स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वर्तमान समय में हिंदी के सामने अनेक नई संभावनाएँ हैं
और डिजिटल युग में हिंदी का विस्तार तेजी से हो रहा है। उन्होंने कहा कि हिंदी को सशक्त बनाने के लिए हमें अपने व्यवहार और कार्यक्षेत्र में हिंदी का अधिकाधिक प्रयोग करना चाहिए तथा नई पीढ़ी को हिंदी साहित्य एवं भाषा से जोड़ना चाहिए।