दीपक गोस्वामी
आज के समय में तकनीक ने हमारे जीवन को जितना आसान बनाया है उतना ही जटिल भी कर दिया है। मोबाइल की एक क्लिक पर पैसा आ जाता है और एक क्लिक पर चला भी जाता है। इसी सुविधा का लाभ उठाकर साइबर अपराधी नए तरीके खोज रहे हैं जिससे वे सीधे लोगों की जेब पर हाथ साफ कर सकें। इन सब तरीकों में सबसे खतरनाक और चुपचाप फैलने वाला तरीका है बैंक खातों को किराये पर लेना। इसे अंग्रेजी में म्यूल अकाउंट कहा जाता है। सुनने में यह शब्द साधारण लगता है परंतु इसके पीछे छिपा हुआ जाल इतना गहरा है कि एक बार फंस जाने के बाद व्यक्ति का पूरा जीवन अंधकार में चला जाता है।
हाल ही में एक खबर में इस समस्या को उजागर किया गया है। खबर के अनुसार कुछ युवा केवल तीन हजार रुपये महीने के लालच में अपना बैंक खाता और डेबिट कार्ड साइबर ठगों को सौंप रहे हैं। ठग इन युवाओं से कहते हैं कि हमें कुछ दिन के लिए आपका खाता चाहिए। बदले में आपको हर महीने तय राशि मिलती रहेगी। बिना मेहनत के पैसा आने की बात सुनकर कई युवा तुरंत हामी भर देते हैं। उन्हें लगता है कि इसमें क्या बुराई है। खाता तो मेरा ही रहेगा। परंतु वे यह नहीं समझते कि वे अपने भविष्य का सौदा कर रहे हैं।
असल में होता यह है कि साइबर अपराधी इन्हीं खातों का उपयोग अपनी अवैध गतिविधियों के लिए करते हैं। ऑनलाइन ठगी से आया हुआ पैसा पहले इन्हीं म्यूल खातों में डाला जाता है। फिर कुछ ही मिनटों में उस पैसे को अलग अलग खातों में बांटकर निकाल लिया जाता है। निवेश के नाम पर ठगी, गिफ्ट भेजने का झांसा, मोबाइल हैक करके पैसे उड़ाना, इन सब अपराधों की कमाई का पहला ठिकाना यही किराये के खाते बनते हैं। जब पुलिस शिकायत के बाद जांच करती है तो पैसा जिस खाते में गया था उसी खाते के मालिक तक पहुंचती है। कानून की नजर में पैसा आपके खाते में आया है इसलिए अपराधी आप हैं। इसके बाद शुरू होता है परेशानियों का सिलसिला।
पुलिस आपके घर आती है। आपके नाम एफआईआर दर्ज होती है। बैंक आपका खाता सीज कर देता है। कोर्ट कचहरी के चक्कर लगने लगते हैं। वकील की फीस और जमानत के लिए पैसे जुटाने पड़ते हैं। सबसे बड़ी बात यह कि एक बार साइबर अपराध में नाम आने के बाद आपका सिविल स्कोर खराब हो जाता है। आगे चलकर आपको न तो लोन मिलता है और न ही क्रेडिट कार्ड। अगर आप सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं तो पुलिस वेरिफिकेशन में ही आप बाहर हो जाते हैं। विदेश जाने के लिए वीजा अप्लाई करेंगे तो वहां भी अड़चन आएगी। केवल तीन हजार रुपये कमाने के चक्कर में आप लाखों रुपये और अपना पूरा करियर दांव पर लगा देते हैं। इसी को सही कहा गया है कि युवा अपना भविष्य खराब कर रहे हैं।
यह समस्या किसी एक शहर तक सीमित नहीं है। देश के हर छोटे बड़े शहर में यह जाल फैल रहा है। ठग सोशल मीडिया, टेलीग्राम और व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से युवाओं को तलाशते हैं। खासकर वे युवा जो बेरोजगार हैं, जिन्हें तुरंत पैसे की जरूरत है, या जो आसानी से पैसा कमाना चाहते हैं, वे इनके निशाने पर होते हैं। ठग बहुत सफाई से बात करते हैं। वे कहते हैं कि यह पूरी तरह कानूनी है। कंपनी का काम है। किसी को कोई नुकसान नहीं होगा। परंतु हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है।
अब सवाल यह उठता है कि इससे बचा कैसे जाए। सबसे पहली बात यह समझनी होगी कि कोई भी वैध संस्था या कंपनी कभी भी आपसे आपका बैंक खाता किराये पर नहीं मांगेगी। बैंक भी कभी फोन करके आपसे ओटीपी, पिन या कार्ड का विवरण नहीं मांगता। अगर कोई व्यक्ति आपको खाता देने के बदले पैसा देने की बात करे तो तुरंत समझ जाइए कि यह धोखा है। लालच में आकर कोई निर्णय लेने से पहले दस बार सोचिए।
यदि दुर्भाग्य से आपके साथ ऐसा हो जाए या आपको पता चले कि आपका खाता गलत काम में इस्तेमाल हो रहा है तो घबराइए नहीं परंतु देरी भी मत कीजिए। घटना के चौबीस घंटे के भीतर भारत सरकार की साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कीजिए। साथ ही अपने बैंक को तुरंत सूचना देकर खाता ब्लॉक करवाइए। इसके बाद http://cybercrime.gov.in वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कीजिए। आपके पास जो भी मैसेज, कॉल रिकॉर्ड या ट्रांजेक्शन का विवरण है उसे संभाल कर रखिए। यह सबूत जांच में आपके काम आएगा।
परिवार और समाज की भी जिम्मेदारी है। माता पिता को चाहिए कि वे अपने बच्चों से बात करें और उन्हें समझाएं कि बिना मेहनत का पैसा हमेशा मुसीबत लेकर आता है। स्कूल और कॉलेजों में साइबर सुरक्षा के बारे में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाने चाहिए। पुलिस को भी चाहिए कि वह ऐसे गिरोहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे जो युवाओं को बहला फुसलाकर उनके खाते का दुरुपयोग करते हैं।
अंत में यही कहा जा सकता है कि डिजिटल दुनिया में सतर्क रहना बहुत जरूरी है। तकनीक बुरी नहीं है परंतु उसका गलत इस्तेमाल करने वाले लोग बहुत खतरनाक हैं। तीन हजार रुपये का लालच आज के समय में किसी के जीवन को बर्बाद करने के लिए काफी है। अपना खाता, अपना पैन कार्ड, अपना आधार कार्ड यह आपकी पहचान हैं। इन्हें किसी अनजान व्यक्ति को सौंपने का मतलब है अपने भविष्य को गिरवी रख देना। इसलिए जागरूक बनिए, दूसरों को जागरूक कीजिए और याद रखिए कि मेहनत से कमाया हुआ पैसा भले ही थोड़ा हो परंतु वह सम्मान और सुरक्षा दोनों देता है।