नोएडा। कारगिल विजय दिवस के अवसर पर रविवार को सेक्टर-6 स्थित इंदिरा गांधी कला केंद्र में अमर वीर शहीदों की स्मृति में भव्य श्रद्धांजलि एवं देशभक्ति संध्या का आयोजन किया गया। पर्वतीय सांस्कृतिक संस्था के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में सेना के वरिष्ठ अधिकारियों, कारगिल युद्ध के वीर योद्धाओं, शहीदों के परिजनों, पूर्व सैनिकों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में नागरिकों ने हिस्सा लिया तथा देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों को नमन किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद "शुभम् करोति कल्याणम्" और "वंदे मातरम्" की प्रस्तुति से पूरा सभागार राष्ट्रभक्ति की भावना से ओत-प्रोत हो गया। रेखा चौहान समूह ने उत्तराखंड देव स्तुति गीत प्रस्तुत किया। संस्था के अध्यक्ष राजेंद्र चौहान ने कार्यक्रम की रूपरेखा रखते हुए कहा कि कारगिल विजय दिवस केवल सैन्य विजय का उत्सव नहीं, बल्कि भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस, शौर्य और सर्वोच्च बलिदान को याद करने का दिन है।
कारगिल के वीरों और सैन्य अधिकारियों का सम्मान
इस अवसर पर मेजर जनरल डॉ. गोपाल कृष्ण थपलियाल, मेजर जनरल सुनील कुमार, कर्नल अशोक कुमार तारा (वीर चक्र), ब्रिगेडियर महेश्वर नाथ कौशिक, ऑनरेरी कैप्टन हरक सिंह, ऑनरेरी कैप्टन योगेंद्र सिंह यादव, नायक राजन सिंह मेहरा और नायक दिनेश चंद्र डांडिया सहित कई सैन्य अधिकारियों एवं वीर सैनिकों को सम्मानित किया गया।
शहीद मेजर अनुराग नौरियाल (कीर्ति चक्र) की धर्मपत्नी श्रीमती उमा नौरियाल और कारगिल युद्ध में शहीद कैप्टन विजयंत थापर (वीर चक्र) के पिता कर्नल वी.एन. थापर का भी विशेष सम्मान किया गया।

बेटे का अंतिम पत्र सुनाते हुए भावुक हुए कर्नल वी.एन. थापर
कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण उस समय आया, जब कर्नल वी.एन. थापर ने कारगिल युद्ध में शहादत से पहले अपने पुत्र कैप्टन विजयंत थापर द्वारा परिवार को लिखे गए अंतिम पत्र को याद किया।
कर्नल थापर ने बताया कि पत्र में कैप्टन विजयंत ने लिखा था कि जब यह चिट्ठी परिवार तक पहुंचेगी, तब वह ऊपर से अपने परिजनों को देख रहे होंगे। उन्होंने अपने बलिदान पर किसी प्रकार का दुख नहीं जताया था। उनकी इच्छा थी कि यदि अगले जन्म में फिर मनुष्य के रूप में जन्म लेने का अवसर मिले तो वह भारत में ही जन्म लें, दोबारा भारतीय सेना में जाएं और मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना जीवन फिर न्यौछावर करें।कर्नल थापर ने बताया कि विजयंत ने अपने अंतिम पत्र में मानवीय संवेदनाओं का भी परिचय दिया था। उन्होंने घर के पड़ोस में रहने वाली एक जरूरतमंद बच्ची का उल्लेख करते हुए अपने माता-पिता से उसकी पढ़ाई जारी रखने और स्कूल फीस भरते रहने का अनुरोध किया था।
कर्नल वी.एन. थापर ने कहा कि उनके बेटे का यह पत्र केवल परिवार के लिए छोड़ा गया संदेश नहीं है, बल्कि देश के युवाओं के लिए राष्ट्रप्रेम, कर्तव्यनिष्ठा और मानवीय संवेदनाओं की प्रेरणा है। उनके संबोधन के दौरान सभागार में भावुक माहौल बन गया और अनेक लोगों की आंखें नम हो गईं।

80 वर्षीय ब्रिगेडियर कौशिक ने साझा किए युद्ध के संस्मरण
80 वर्षीय ब्रिगेडियर महेश्वर नाथ कौशिक ने भारतीय सेना में अपने लंबे सेवाकाल के दौरान विभिन्न युद्धों और सैन्य अभियानों से जुड़े अनुभव साझा किए। उन्होंने सीमा पर कठिन परिस्थितियों में सैनिकों के साहस, अनुशासन, त्याग और राष्ट्र के प्रति समर्पण की कई प्रेरक घटनाएं सुनाईं।
उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा केवल सैनिकों की जिम्मेदारी नहीं है। प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखे और अपने स्तर पर देश की मजबूती में योगदान दे। उनके अनुभवों और संस्मरणों को लोगों ने पूरे ध्यान से सुना और तालियों के साथ उनका अभिनंदन किया।
देशभक्ति गीतों से गूंजा सभागार
देशभक्ति संध्या में रोहित चौहान एवं कल्पना चौहान ने देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति देकर माहौल को राष्ट्रप्रेम से सराबोर कर दिया। भगवत मनराल टीम ने "चल कदम कदम", उत्तराखंडी प्रस्तुति "दूर बड़ी दूर बर्फीले" और "देश रंगीला-रंगीला" प्रस्तुत कर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।
सीमा पवार एवं रजनी जोशी ने "मिट्टी के बेटे" की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। अंजलि भट्ट एवं ग्रेटर नोएडा वेस्ट की टीम ने "संदेशे आते हैं" और "कंधों से कंधे मिलते हैं" जैसे देशभक्ति गीतों पर प्रस्तुति देकर दर्शकों को भावुक कर दिया। रेखा चौहान की टीम द्वारा प्रस्तुत उत्तराखंड का पारंपरिक लोकनृत्य 'तुलका छिप्पी' भी कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षणों में रहा।
'भारत माता की जय' के नारों से गूंजा कला केंद्र
कार्यक्रम के दौरान "भारत माता की जय", "वंदे मातरम्" और "भारतीय सेना अमर रहे" के जयघोष से पूरा सभागार गूंजता रहा। अंत में धन्यवाद ज्ञापन के बाद राष्ट्रगान हुआ और सभी उपस्थित लोगों ने कारगिल के अमर शहीदों को श्रद्धापूर्वक नमन किया।
वक्ताओं ने कहा कि कारगिल विजय दिवस उन वीर सपूतों के अदम्य साहस और बलिदान की याद दिलाता है, जिन्होंने देश की सीमाओं की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को भारतीय सेना के शौर्य से परिचित कराने के साथ युवाओं में देशभक्ति, राष्ट्रसेवा और सैनिकों के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत करते हैं।