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Updated: 26 September 2026 | Hindi News Portal
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2030 तक भारत को 100 अरब डॉलर का टेक्सटाइल एक्सपोर्ट पावरहाउस बनाने का लक्ष्य: राजीव बंसल

सूरत/नोएडा। भारत के टेक्सटाइल और अपैरल सेक्टर को वैश्विक स्तर पर और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने तथा वर्ष 2030 तक देश के वस्त्र निर्यात को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य को लेकर सूरत में नेशनल टेक्सटाइल एक्सपोर्ट कॉन्क्लेव-2026 का आयोजन किया गया।

आज का मुद्दा डिजिटल डेस्क | Updated: 27 Jul 2026, 08:53 PM | Views: 0 | 2 मिनट पढ़ें
2030 तक भारत को 100 अरब डॉलर का टेक्सटाइल एक्सपोर्ट पावरहाउस बनाने का लक्ष्य: राजीव बंसल

इस रिपोर्ट में क्या खास है?

  • खबर को स्थानीय पाठकों के संदर्भ में सरल भाषा में समझाया गया है।
  • जहां उपलब्ध हो, आधिकारिक जानकारी, प्रत्यक्ष बयान और जमीन से मिली जानकारी को आधार बनाया जाता है।
  • नई जानकारी आने पर रिपोर्ट को अपडेट किया जाता है और तारीख ऊपर दी जाती है।

सूरत/नोएडा। भारत के टेक्सटाइल और अपैरल सेक्टर को वैश्विक स्तर पर और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने तथा वर्ष 2030 तक देश के वस्त्र निर्यात को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य को लेकर सूरत में नेशनल टेक्सटाइल एक्सपोर्ट कॉन्क्लेव-2026 का आयोजन किया गया। कॉन्क्लेव की थीम “India @ USD 100 Billion Textile Exports by 2030” रही।

टेक्सटाइल एंड अपैरल डेवलपमेंट एसोसिएशन (TAADA) द्वारा iNDEXTb, गुजरात सरकार के सहयोग से आयोजित यह कॉन्क्लेव सूरत के सरसाना स्थित SIECC के प्लेटिनम हॉल में हुआ। इसमें करीब 500 निर्यातकों, उद्योगपतियों, नीति निर्माताओं, शिक्षाविदों, उद्यमियों और टेक्सटाइल क्षेत्र से जुड़े अन्य हितधारकों ने हिस्सा लिया।

कॉन्क्लेव में इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (IIA) के उपाध्यक्ष राजीव बंसल ने मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित किया। उन्होंने वैश्विक टेक्सटाइल और अपैरल वैल्यू चेन में भारत की मौजूदा स्थिति के साथ भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से अपने विचार रखे।

MSME निर्यातकों के सामने चुनौतियों के साथ बड़े अवसर

राजीव बंसल ने अपने संबोधन में कहा कि वैश्विक बाजार में तेजी से हो रहे बदलावों के बीच भारतीय टेक्सटाइल उद्योग के सामने चुनौतियों के साथ अनेक नए अवसर भी मौजूद हैं। विशेष रूप से MSME निर्यातकों को वैश्विक बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए नवाचार, आधुनिक तकनीक, स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुपालन पर विशेष ध्यान देना होगा।

उन्होंने भारतीय टेक्सटाइल उत्पादों को वैश्विक स्तर पर और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए लॉजिस्टिक्स व्यवस्था मजबूत करने, कौशल विकास को बढ़ावा देने और उत्पादों में विविधता लाने की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके साथ ही कारोबार करने की प्रक्रिया को और आसान बनाने तथा उद्योगों को बेहतर कारोबारी वातावरण उपलब्ध कराने की जरूरत बताई।

बंसल ने कहा कि भारत में विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम तैयार करने के लिए सरकार और उद्योग के बीच मजबूत सहयोग बेहद जरूरी है।

गुजरात के लिए 15 अरब डॉलर के टेक्सटाइल निर्यात का रोडमैप

कॉन्क्लेव में भारत के वर्ष 2030 तक 100 अरब डॉलर के टेक्सटाइल निर्यात लक्ष्य के साथ-साथ गुजरात से 15 अरब डॉलर के टेक्सटाइल निर्यात के रोडमैप पर भी विशेष चर्चा हुई।

विभिन्न सत्रों में निर्यातकों, नीति निर्माताओं और उद्योग विशेषज्ञों ने टेक्सटाइल सेक्टर में इनोवेशन, नई तकनीक, सस्टेनेबिलिटी, नीतिगत सुधार, वैश्विक बाजार के अवसर तथा निर्यात बढ़ाने की रणनीतियों पर अपने विचार साझा किए।

कॉन्क्लेव में हुई चर्चाओं में इस बात पर जोर दिया गया कि सामूहिक प्रयासों के माध्यम से भारत के टेक्सटाइल सेक्टर को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट हब के रूप में विकसित किया जा सकता है।

TAADA ने राजीव बंसल के योगदान को सराहा

कार्यक्रम के बाद टेक्सटाइल एंड अपैरल डेवलपमेंट एसोसिएशन (TAADA) की ओर से राजीव बंसल को प्रशंसा पत्र भी प्रदान किया गया। इसमें वक्ता के रूप में उनके योगदान और टेक्सटाइल निर्यात, इनोवेशन, सस्टेनेबिलिटी, नीतिगत पहल तथा वैश्विक अवसरों से जुड़े विषयों पर रखे गए विचारों की सराहना की गई।

राजीव बंसल ने आयोजन के लिए TAADA के अध्यक्ष डॉ. अजय भट्टाचार्य, पूरी आयोजन टीम और iNDEXTb (गुजरात सरकार) का आभार जताया। उन्होंने कहा कि निर्यातकों, उद्यमियों, उद्योग विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं के सामूहिक प्रयासों से भारतीय टेक्सटाइल उद्योग को अधिक मजबूत, टिकाऊ और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि “भारत को वर्ष 2030 तक 100 अरब डॉलर के टेक्सटाइल निर्यात वाला वैश्विक पावरहाउस बनाने के लिए उद्योग और सरकार को मिलकर काम करना होगा।”

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Author: आज का मुद्दा डिजिटल डेस्क

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