ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा के चाई -5 क्षेत्र में “सिग्नेचर पार्क” नाम से संचालित किए जा रहे एक रियल एस्टेट प्रोजेक्ट को लेकर अब कई गंभीर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि पाटलिपुत्र बिल्डर्स, पटना से जुड़े इस प्रोजेक्ट पर पिछले लगभग 10 वर्षों से काम किए जाने के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद अब “Patliputra is now coming in Greater Noida” के नाम से नए सिरे से प्रचार किया जा रहा है।स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों के केंद्र में प्रोजेक्ट की वास्तविक स्थिति, निवेशकों से धन जुटाने का तरीका, निर्माण एवं विकास अधिकारों की वैधानिकता तथा प्रचार में किए जा रहे दावों की पारदर्शिता शामिल है।

पुराने मामलों से जुड़े होने का दावा
पाटलिपुत्र बिल्डर्स, पटना के मालिक अनिल कुमार को लेकर आरोप लगाया जा रहा है कि उनके खिलाफ पटना और रांची में पहले से कई धोखाधड़ी के मामले सामने आ चुके हैं। यह भी दावा किया जा रहा है कि वे ईडी तथा पीएमएलए से जुड़े मामलों में जेल जा चुके हैं।हालांकि, इन दावों की पुष्टि के लिए संबंधित प्राथमिकी, न्यायालयीन रिकॉर्ड, ईडी की आधिकारिक कार्रवाई और मामलों की वर्तमान स्थिति सामने आना जरूरी है। किसी मामले में आरोप, गिरफ्तारी या जांच अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं माने जा सकते।

करीब 10 वर्षों से प्रोजेक्ट, फिर नए आगमन का प्रचार क्यों?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि “सिग्नेचर पार्क” प्रोजेक्ट ग्रेटर नोएडा के चाई-5 में पिछले लगभग एक दशक से संचालित या प्रचारित किया जा रहा है, तो अब “Patliputra is now coming in Greater Noida” के नाम से इसे नए आगमन के रूप में क्यों प्रस्तुत किया जा रहा है?
आरोप लगाने वालों का कहना है कि कंपनी पहले से ही प्रोजेक्ट के नाम पर गतिविधियां कर रही है और समय-समय पर इवेंट आयोजित किए जाते रहे हैं। ऐसे में नए प्रचार के जरिए संभावित खरीदारों और निवेशकों को प्रोजेक्ट की वास्तविक स्थिति के बारे में क्या जानकारी दी जा रही है, यह जांच का विषय बन गया है।क्या यह पहले से चल रहे प्रोजेक्ट का नया चरण है? क्या कंपनी का स्वरूप, परियोजना का नाम या विकास अधिकार बदले हैं? अथवा यह केवल नए निवेश जुटाने के लिए किया जा रहा प्रचार है? इन सवालों का स्पष्ट जवाब कंपनी और संबंधित प्राधिकरणों से मिलना चाहिए।

FAR डिस्ट्रीब्यूशन में उपलब्ध नहीं बताए जा रहे प्रोडक्ट की लॉन्चिंग का आरोप
मामले में एक और गंभीर आरोप यह है कि आगामी इवेंट के माध्यम से ऐसे प्रोडक्ट को लॉन्च करने की तैयारी की जा रही है, जो कथित तौर पर FAR डिस्ट्रीब्यूशन में उपलब्ध ही नहीं है।रियल एस्टेट परियोजनाओं में FAR यानी Floor Area Ratio निर्माण की अनुमत सीमा और विकास क्षमता से जुड़ा महत्वपूर्ण मानदंड है। ऐसे में यदि कोई प्रोडक्ट स्वीकृत FAR, लेआउट, विकास अधिकारों या संबंधित अनुमतियों के अनुरूप नहीं है, तो उसकी बिक्री या बुकिंग से पहले वैधानिक स्थिति स्पष्ट होना आवश्यक है।
यहां सवाल उठता है कि प्रस्तावित प्रोडक्ट को लॉन्च करने से पहले क्या संबंधित प्राधिकरणों से आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त की गई हैं? क्या संभावित निवेशकों को FAR डिस्ट्रीब्यूशन, निर्माण अधिकार, स्वीकृत मानचित्र और परियोजना की वास्तविक स्थिति की पूरी जानकारी दी जा रही है?
यदि प्रोडक्ट स्वीकृत प्रावधानों में उपलब्ध नहीं है, तो उसके नाम पर बुकिंग या धनराशि जुटाने की प्रक्रिया निवेशकों के लिए जोखिम पैदा कर सकती है। इसलिए इस बिंदु पर दस्तावेजी जांच बेहद जरूरी है।
इवेंट के जरिए बाजार से धन जुटाने के आरोप
आरोप है कि संबंधित समूह की ओर से बार-बार इवेंट आयोजित कर बाजार से धन जुटाने का प्रयास किया जाता रहा है। इस बार भी एक नए इवेंट के माध्यम से संभावित खरीदारों और निवेशकों को आकर्षित करने की तैयारी की जा रही है। ऐसे में यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि इवेंट में किस प्रकार के प्रोडक्ट पेश किए जा रहे हैं, बुकिंग या निवेश के लिए किन शर्तों का इस्तेमाल किया जा रहा है, धनराशि किस कंपनी या संस्था के खाते में ली जाएगी और निवेशकों को किस प्रकार के दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएंगे।क्या निवेशकों को प्रोजेक्ट की स्वीकृतियां दिखाई जा रही हैं? क्या बुकिंग से पहले रेरा पंजीकरण, भूमि अधिकार और निर्माण अनुमति की जानकारी दी जा रही है? क्या पहले के आयोजनों के बाद निवेशकों को कब्जा, रिफंड या अन्य वादों के संबंध में कोई परेशानी हुई है? इन सवालों के जवाब सार्वजनिक होना जरूरी हैं।

सांसद मनोज तिवारी की तस्वीर के इस्तेमाल पर भी उठे सवाल
इस पूरे प्रचार अभियान में सांसद मनोज तिवारी की तस्वीर के इस्तेमाल की बात भी सामने आ रही है। इसको लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या उनकी तस्वीर का इस्तेमाल उनकी अनुमति से किया जा रहा है और क्या उनका इस प्रोजेक्ट या कंपनी के प्रचार से कोई आधिकारिक संबंध है?
किसी जनप्रतिनिधि या सार्वजनिक व्यक्ति की तस्वीर का इस्तेमाल विज्ञापन में होने से आम लोगों के बीच उस प्रोजेक्ट के प्रति भरोसा पैदा हो सकता है। इसलिए यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि तस्वीर का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया है और क्या इसके लिए औपचारिक अनुमति ली गई है।
यदि तस्वीर का इस्तेमाल बिना अनुमति, भ्रामक तरीके से या किसी व्यावसायिक दावे को विश्वसनीय दिखाने के लिए किया गया है, तो यह संबंधित व्यक्ति की प्रतिष्ठा का विषय बन सकता है। इस मामले में सांसद मनोज तिवारी और उनके कार्यालय का पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा।
प्राधिकरण की भूमिका पर भी सवाल
ग्रेटर नोएडा में किसी भी रियल एस्टेट प्रोजेक्ट के लिए भूमि उपयोग, लेआउट, निर्माण अनुमति, FAR, विकास अधिकार और अन्य नियामकीय स्वीकृतियों की स्थिति स्पष्ट होना आवश्यक है। ऐसे में संबंधित प्राधिकरण से यह सवाल पूछा जाना चाहिए कि:

Chi 5 स्थित “सिग्नेचर पार्क” प्रोजेक्ट की वर्तमान वैधानिक स्थिति क्या है?,प्रोजेक्ट के लिए कौन-कौन सी स्वीकृतियां जारी की गई हैं?,जिस प्रोडक्ट को लॉन्च करने की बात कही जा रही है, क्या वह स्वीकृत FAR और विकास प्रावधानों में शामिल है?,क्या कंपनी या उससे जुड़े पक्षों को बुकिंग अथवा धनराशि जुटाने की अनुमति है?,क्या प्रोजेक्ट के संबंध में पहले कोई शिकायत, जांच या कार्रवाई हुई है?,क्या नए प्रचार में किए जा रहे दावों का प्राधिकरण के रिकॉर्ड से मिलान किया गया है?
निवेशकों के हित में पारदर्शी जांच की मांग
पूरे मामले में उठ रहे आरोपों को देखते हुए निवेशकों के हित में निष्पक्ष और दस्तावेज आधारित जांच की आवश्यकता महसूस की जा रही है। जांच में प्रोजेक्ट की भूमि और विकास अधिकारों, FAR डिस्ट्रीब्यूशन, स्वीकृत मानचित्र, रेरा स्थिति, पूर्व इवेंट्स में जुटाई गई धनराशि और संभावित खरीदारों को किए गए दावों की समीक्षा की जानी चाहिए। साथ ही, कंपनी से यह भी स्पष्ट करने की अपेक्षा है कि पिछले लगभग 10 वर्षों में प्रोजेक्ट के नाम पर क्या गतिविधियां की गईं, कितने निवेशकों से धन लिया गया, किस प्रकार के प्रोडक्ट बेचे या पेश किए गए और वर्तमान में परियोजना की वास्तविक स्थिति क्या है।

कंपनी और संबंधित पक्षों का पक्ष जरूरी
इस रिपोर्ट में उठाए गए सभी बिंदु उपलब्ध आरोपों और सवालों पर आधारित हैं। पाटलिपुत्र बिल्डर्स, अनिल कुमार, संबंधित प्रोजेक्ट प्रबंधन, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण तथा सांसद मनोज तिवारी या उनके कार्यालय का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।
मुख्य सवाल यही है कि यदि प्रोजेक्ट पहले से वर्षों से चल रहा है, तो अब नए आगमन का प्रचार क्यों किया जा रहा है और निवेशकों को पेश किए जा रहे प्रोडक्ट की वैधानिक स्थिति क्या है?