आज का मुद्दा
दिल्ली। दीपावली के पावन अवसर पर सद्गुरुदेव भगवान के प्रति श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक श्री नंगली साहिब की 52वीं पावन पदयात्रा का आयोजन किया जा रहा है। 4 नवंबर को दिल्ली से शुरू हुई यह पदयात्रा 7 नवंबर को सद्गुरुधाम श्री नंगली साहिब पहुंचेगी। इस धार्मिक यात्रा में दिल्ली सहित देश के विभिन्न राज्यों से हजारों श्रद्धालु उत्साह और श्रद्धा के साथ शामिल हो रहे हैं।
बताया जाता है कि इस पावन पदयात्रा की शुरुआत वर्ष 1975 में परम पूज्य सद्गुरुदेव भगवान की आज्ञा एवं आशीर्वाद से हुई थी। तभी से प्रत्येक वर्ष दीपावली के अवसर पर श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल होकर गुरु महाराज के प्रति अपनी आस्था और समर्पण प्रकट करते आ रहे हैं।पदयात्रा के दौरान श्रद्धालु सद्गुरुदेव भगवान का संकीर्तन करते हुए, भजन गाते हुए और गुरु महाराज की महिमा का गुणगान करते हुए आगे बढ़ते हैं। भक्त अपने साथ श्री नंगली साहिब का पावन ध्वज लेकर चलते हैं और सद्गुरुधाम पहुंचकर गुरु महाराज के चरणों में शीश नवाते हैं।
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चरण-रज और पावन जल के प्रति श्रद्धालुओं की विशेष आस्था
श्री नंगली साहिब पहुंचने वाले श्रद्धालुओं में वहां की पवित्र चरण-रज को अपने साथ ले जाने की विशेष परंपरा और मान्यता है। भक्त इसे सद्गुरुदेव भगवान के आशीर्वाद का प्रतीक मानते हैं।इसके अलावा दरबार में स्थित एक प्राचीन नल के जल को लेकर भी श्रद्धालुओं में विशेष धार्मिक मान्यता है। बताया जाता है कि इस नल की स्थापना गुरुमहाराज जी के कर-कमलों से हुई थी। भक्तों की मान्यता है कि इस जल में अड़सठ तीर्थों के स्नान के समान पुण्य प्राप्त होता है। श्रद्धालु इस जल का सेवन करने, स्नान करने और इसे अपने घर ले जाने के लिए भी श्रद्धापूर्वक पहुंचते हैं।

यह पदयात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि गुरु-भक्ति, प्रेम, विश्वास और आपसी समर्पण का प्रतीक बन चुकी है। 7 नवंबर को सद्गुरुधाम श्री नंगली साहिब पहुंचने के साथ ही पदयात्रा का समापन होगा। इस दौरान श्रद्धालु सद्गुरुदेव भगवान के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।