यमुना प्राधिकरण और एक्सप्रेस-वे की समस्याओं पर किसान यूनियन का आंदोलन तेज, अधिकारियों को सौंपा जाएगा ज्ञापन
जेवर। ग्राम रौनीजा में पिछले 12 माह से यमुना औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) एवं यमुना एक्सप्रेस-वे से जुड़ी विभिन्न समस्याओं को लेकर भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति का धरना लगातार जारी है।
यमुना औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) एवं यमुना एक्सप्रेस-वे से जुड़ी विभिन्न समस्याओं को लेकर भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति का धरना लगातार जारी
जेवर। ग्राम रौनीजा में पिछले 12 माह से यमुना औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) एवं यमुना एक्सप्रेस-वे से जुड़ी विभिन्न समस्याओं को लेकर भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति का धरना लगातार जारी है। इसी क्रम में संगठन के गौतमबुद्ध नगर जनपद के पदाधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें आंदोलन की आगामी रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।बैठक में यमुना एक्सप्रेस-वे जेवर टोल प्लाजा पर तैनात सुरक्षा कंपनी के मैनेजर द्वारा किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं के प्रति की गई कथित अभद्र टिप्पणी को लेकर गहरा रोष व्यक्त किया गया। पदाधिकारियों ने इसे किसानों और संगठन के सम्मान पर आघात बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि आगामी बुधवार को प्रातः 11 बजे भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति के सभी पदाधिकारी यमुना औद्योगिक विकास प्राधिकरण के अधिकारियों से मुलाकात करेंगे और उन्हें पूरे घटनाक्रम एवं किसानों की समस्याओं से अवगत कराएंगे। साथ ही माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश एवं यमुना औद्योगिक विकास प्राधिकरण के मुख्यकार्यपालक अधिकारी (CEO) के नाम संबोधित एक ज्ञापन भी सौंपा जाएगा।संगठन के नेताओं ने कहा कि क्षेत्र के किसानों की भूमि, मुआवजा, पुनर्वास तथा अन्य लंबित समस्याओं के समाधान के लिए पिछले एक वर्ष से धरना चल रहा है, लेकिन अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। किसानों के धैर्य की परीक्षा लगातार ली जा रही है, जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।बैठक का नेतृत्व भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति के राष्ट्रीय अध्यक्ष मास्टर श्यौराज सिंह ने किया, जबकि अध्यक्षता ठाकुर ओमवीर सिंह ने की।
बैठक का संचालन रविन्द्र खाजपुर ने किया।इस अवसर पर हरेंद्र सिंह, अरुण चौधरी, विनोद खाजपुर, आनंद भाटी, जयप्रकाश भाटी सहित संगठन के अनेक पधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि किसानों की समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया और किसान हितों की अनदेखी जारी रही तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
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