मनिषा कोईराला का नाम भारतीय सिनेमा की चमकती तारिकाओं में शुमार

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मनिषा कोईराला का नाम भारतीय सिनेमा की चमकती तारिकाओं में शुमार

मनिषा कोईराला का नाम भारतीय सिनेमा की चमकती तारिकाओं में शुमार है। नेपाल में 16 अगस्त 1970 को एक प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार में जन्मी मनिषा ने 1989 में नेपाली फिल्म "फेरी भेटौला" से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की। इसके बाद 1991 में उन्होंने हिंदी सिनेमा में "सौदागर" से कदम रखा। हालाँकि करियर में शुरूआती चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन "1942: ए लव स्टोरी" (1994) और तमिल फिल्म "बॉम्बे" (1995) से उन्होंने खुद को भारतीय फिल्म उद्योग में स्थापित कर लिया। इन फिल्मों में उनकी शानदार अदाकारी ने दर्शकों और समीक्षकों को प्रभावित किया, जिससे वह सफलता के शिखर पर पहुंचीं।

उनकी फिल्मों "अग्नि साक्षी" (1996), "गुप्त: द हिडन ट्रुथ" (1997), "कच्चे धागे" (1999), "मुधलवन" (1999), "कंपनी" (2002), और "एक छोटीसी लव स्टोरी" (2002) में भी उन्होंने अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई। "अकेले हम अकेले तुम" (1995), "खामोशी: द म्यूजिकल" (1996), "दिल से.." (1998), "लज्जा" (2001), और "एस्केप फ्रॉम तालिबान" (2003) में उनकी भूमिकाएं भी आलोचकों से सराही गईं। मनिषा की अदाकारी ने इन फिल्मों को यादगार बना दिया।

बॉलीवुड में अपने योगदान के अलावा, मनिषा को सामाजिक कार्यों के लिए भी जाना जाता है। उन्होंने महिलाओं के अधिकारों, मानव तस्करी की रोकथाम और कैंसर जागरूकता जैसे मुद्दों पर अपनी आवाज बुलंद की। 2012 में ओवेरियन कैंसर से लड़ने के बाद, उन्होंने अपनी किताब "हील्ड" में अपनी इस कठिन यात्रा के बारे में बताया।

कैंसर से जंग जीतने के बाद, मनिषा ने "डियर माया" (2017) से सिनेमा में वापसी की। इसके बाद "लस्ट स्टोरीज" और "संजू" (2018) में भी उन्होंने बेहतरीन अभिनय किया। 2024 में वह "हीरामंडी" नामक वेब सीरीज में मल्लिका जान के रूप में नजर आईं। मनिषा ने अपने जीवन और करियर में उतार-चढ़ाव के बावजूद अपने दर्शकों के दिल में अपनी जगह बनाई है।