इंद्र यादव/मुंबई: फिल्मी परदे पर विलेन को एक लात में आसमान की सैर कराने वाले 'एक्शन हीरो' टाइगर श्रॉफ को असल जिंदगी में गोलियों की भाषा से रूबरू होना पड़ा है। मामला मायानगरी मुंबई के पॉश इलाके जुहू का है, जहां संडे की शाम गोलियों की तड़तड़ाहट से सन्नाटा टूट गया। निशाना थे टाइगर श्रॉफ और उनकी गाड़ी, लेकिन विडंबना देखिए कि गोलियों के इस खेल में सफर तय करना पड़ा उनके ड्राइवर और एक बेकसूर ऑटो-रिक्शा चालक को।
जुहू का पुष्पा पार्क इलाका और अचानक से प्रकट होते तीन अज्ञात मोटरसाइकिल सवार बदमाश। इन सूरमाओं ने बिना किसी फिल्मी क्लाइमैक्स के टाइगर श्रॉफ की गाड़ी पर अंधाधुंध गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। शुक्र है कि टाइगर साहब पूरी तरह सुरक्षित हैं (DCP मोहित गर्ग ने इसकी आधिकारिक पुष्टि कर दी है), वरना पर्दे पर स्टंट करने वाले कलाकारों की असल जिंदगी की सुरक्षा पर तो भगवान ही मालिक है।लेकिन सवाल यह उठता है कि गोलियां टाइगर की गाड़ी पर चलीं, और भुगतना पड़ा उनके ड्राइवर और सड़क पर चल रहे एक बेचारे ऑटो वाले को, जो अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। इन शूटरों का निशाना चूका या दहशत फैलाने का स्टाइल ही यही है, यह तो पुलिस की जांच ही बताएगी।
इस हमले की जिम्मेदारी लेते ही सोशल मीडिया और गलियारों में जिस नाम की गूंज उठी, वह है- लॉरेंस बिश्नोई गैंग। भाई, इन महाशयों का दायरा अब फिल्मों की स्क्रिप्ट से भी आगे निकल चुका है। इस हमले के साथ ही उन्होंने बॉलीवुड के 'दबंग' सलमान खान के नाम पर एक बार फिर नई धमकी जारी कर दी है।अब आम जनता और सिने प्रेमियों के जेहन में एक तीखा सवाल यह है कि क्या बॉलीवुड के सितारों का कसूर सिर्फ इतना है कि वे फिल्मों में काम करते हैं, या इंडस्ट्री में अब अपराध सिंडिकेट ही तय करेगा कि कौन किस पार्क से गुजरेगा और कौन किस सेट पर सांस लेगा? टाइगर श्रॉफ का इस पूरे मामले से दूर-दूर तक कोई निजी लेना-देना न होने के बावजूद उन्हें इस खौफनाक चक्रव्यूह में घसीटना, गैंग्स की पब्लिसिटी स्टंट और कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ाने की पराकाष्ठा नहीं तो और क्या है!
घटना की सूचना मिलते ही जुहू पुलिस स्टेशन की नींद टूटी, मामला दर्ज हुआ और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। हमेशा की तरह अब 'CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं' और 'आरोपियों की तलाश के लिए टीमें गठित कर दी गई हैं'—यह वही जुमला है जो हर बड़ी घटना के बाद अखबारों की सुर्खियां बनता है।जब तक गोलियां चलती रहेंगी, नेताओं के बयान आते रहेंगे, पुलिस 'फुटेज' में अपराधियों को ढूंढती रहेगी और फिल्मी सितारे अपनी जान बचाने के लिए बुलेटप्रूफ गाड़ियों के पीछे छुपते रहेंगे, तब तकमायानगरी की चमक के पीछे पल रहा यह खौफ का काला साया यूं ही नाचता रहेगा।
फिलहाल, टाइगर श्रॉफ सुरक्षित हैं, पुलिस अपनी खानापूर्ति में जुटी है, और आम आदमी यह सोचने पर मजबूर है कि जिस शहर में दिनदहाड़े गोलियां चल सकती हैं, वहां आम नागरिक की सुरक्षा की गारंटी कौन देगा!