नोएडा । महिलाओं में स्तन संबंधी बीमारियों के इलाज को नई दिशा देते हुए फोर्टिस हॉस्पीटल नोएडा ने पहली बार वैक्यूम-असिस्टेड ब्रेस्ट बायोप्सी तकनीक की शुरुआत की है। इस अत्याधुनिक मिनीमली इनवेसिव तकनीक के माध्यम से स्तन की गैर-कैंसरकारी गांठों (बिनाइन ब्रेस्ट लंप) को बिना बड़ी सर्जरी, कम दर्द और लगभग बिना निशान के हटाया जा सकता है।
अस्पताल में हाल ही में 49 वर्षीय महिला का सफलतापूर्वक उपचार किया गया, जो पिछले दो वर्षों से स्तन में मौजूद दर्दनाक गांठ की समस्या से परेशान थीं। जांच के दौरान डॉक्टरों ने उनके दाएं स्तन में एक छोटी गांठ की पहचान की। अल्ट्रासाउंड और फाइन नीडल एस्पिरेशन साइटोलॉजी (एफएनएसी) जांच में गांठ के गैर-कैंसरकारी होने की पुष्टि हुई।
इसके बाद फोर्टिस हॉस्पीटल नोएडा के डायरेक्टर जनरल सर्जरी डॉ. वी.एस. चौहान के नेतृत्व में विशेषज्ञ टीम ने मरीज को वीएबीबी तकनीक से उपचार की सलाह दी। महज 15 मिनट चली इस प्रक्रिया में केवल 3 से 4 मिलीमीटर का छोटा चीरा लगाकर वैक्यूम-असिस्टेड डिवाइस की सहायता से पूरी गांठ निकाल दी गई। सर्जरी के दौरान न तो अधिक रक्तस्राव हुआ और न ही टांकों की आवश्यकता पड़ी। सफल उपचार के बाद मरीज को अगले ही दिन अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
बाद में हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच में गांठ के बिनाइन फाइब्रोएडेनोमा होने की पुष्टि हुई। मरीज ने तेजी से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किया और जल्द ही अपनी सामान्य दिनचर्या में लौट आईं।
डॉ. वी.एस. चौहान ने बताया कि स्तन में गांठ होने पर अधिकांश महिलाएं कैंसर की आशंका से घबरा जाती हैं, जबकि सभी गांठें कैंसरकारी नहीं होतीं। वीएबीबी जैसी आधुनिक तकनीक गैर-कैंसरकारी गांठों के सुरक्षित और प्रभावी उपचार का बेहतर विकल्प है। उन्होंने कहा कि इस तकनीक से दर्द कम होता है, निशान लगभग दिखाई नहीं देता और मरीज जल्दी स्वस्थ होकर सामान्य जीवन में लौट सकता है।
फोर्टिस हॉस्पीटल नोएडा के जोनल डायरेक्टर मोहित सिंह ने कहा कि अस्पताल मरीजों को अत्याधुनिक और मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। वीएबीबी तकनीक का सफल उपयोग महिलाओं के लिए बेहतर उपचार, त्वरित रिकवरी और उत्कृष्ट कॉस्मेटिक परिणाम सुनिश्चित करेगा। उन्होंने महिलाओं से नियमित सेल्फ-ब्रेस्ट जांच करने और किसी भी असामान्य बदलाव की स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेने की अपील की।
विशेषज्ञों के अनुसार, वीएबीबी तकनीक फिलहाल देश के चुनिंदा चिकित्सा संस्थानों में ही उपलब्ध है और यह पारंपरिक ओपन सर्जरी की तुलना में अधिक सुविधाजनक तथा प्रभावी मानी जाती है।