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Updated: 24 September 2026 | Hindi News Portal
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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रिया, बोले- लोकतंत्र के लिए बड़ी जीत

धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद से शनिवार को इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफा देने को लेकर विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रिया सामने आई है।

आज का मुद्दा डिजिटल डेस्क | Updated: 25 Jul 2026, 05:26 PM | Views: 0 | 3 मिनट पढ़ें
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रिया, बोले- लोकतंत्र के लिए बड़ी जीत

इस रिपोर्ट में क्या खास है?

  • खबर को स्थानीय पाठकों के संदर्भ में सरल भाषा में समझाया गया है।
  • जहां उपलब्ध हो, आधिकारिक जानकारी, प्रत्यक्ष बयान और जमीन से मिली जानकारी को आधार बनाया जाता है।
  • नई जानकारी आने पर रिपोर्ट को अपडेट किया जाता है और तारीख ऊपर दी जाती है।

धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद से शनिवार को इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफा देने को लेकर विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रिया सामने आई है।राजद सांसद मनोज झा ने एक वीडियो साझा करते हुए कहा, “युवाओं के जोश की वजह से धर्मेंद्र प्रधानको इस्तीफा देने पर मजबूर होना पड़ा है। छात्रों ने लोकतंत्र में उत्तरदायित्व को फिर से कायम किया।उन्होंने कहा कि उत्तरदायित्व से भरी हुई एक बेहतर व्यवस्था का निर्माण किया जाना चाहिए। राष्ट्र सेमोहब्बत थी, इसलिए लोग अलग-अलग शहरों में प्रदर्शन करते रहे। जिन लोगों ने प्रदर्शन किया, उनके जज्बे को सलाम।”


आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा,“धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर पूरे देश को बधाई। डेमोक्रेसी के लिए बड़ी जीत।” उन्होंने एक वीडियो शेयरकर कहा कि लोगों का संघर्ष रंग लाया और धर्मेंद्र प्रधान को आखिरकार इस्तीफा देना पड़ा। लोगों कोलगने लगा था कि सरकारें सुनती नहीं हैं। इतने बड़े संघर्ष के बाद सरकार को झुकना पड़ा। सरकार कोभी समझना होगा कि उनको भी जनता की सुननी पड़ेगी। मेरी उम्मीद है कि सरकार नीट के सिस्टम कोठीक करेगी, जिससे बच्चों को आत्महत्या न करनी पड़ी।पंजाब सरकार में मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “देश के युवाओं ने एक बहुत बड़ा आंदोलन शुरू कियाथा, क्योंकि जब से भारतीय जनता पार्टी की सरकार आई है, पेपर लीक हो रहे हैं, एग्जाम के पेपर बेचे
जा रहे हैं, और स्टूडेंट्स के भविष्य के साथ समझौता किया जा रहा है। देश भर के स्टूडेंट्स एकजुट हुए,एक बड़ा संघर्ष किया, अपनी आवाज़ उठाई, और विरोध प्रदर्शन किए।”

हरपाल सिंह चीमा ने आगे कहा, “कई दिनों तक भारतीय जनता पार्टी ने आंदोलन को तोड़ने की कोशिश की, लेकिन देश के युवा एकजुट रहे। आज देश के घमंडी शासकों, घमंडी भारतीय जनता पार्टी को झुकनापड़ा। धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है, और मेरा मानना ​​है कि यह हमारे स्टूडेंट्स और देश केभविष्य के लिए एक बहुत बड़ी जीत है।”कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने कहा, “यह बहुत अच्छा फैसला है। मैं कहूंगा कि इससे पता चलता है किजनता के दबाव से क्या हासिल किया जा सकता है। यह मुद्दा लोगों के ध्यान में आ गया है। राजनीतिमें, नेताओं को हमेशा जनता से जुड़े रहना चाहिए और लोगों की बात सुननी चाहिएटीएमसी विधायक कुणाल घोष ने कहा, “यह पहले हो जाना चाहिए था। इसमें इतने दिन क्यों लगे? यहपहले हो जाना चाहिए था। पूरा देश इसकी मांग कर रहा था। भाजपा उन्हें बचा रही थी।”

ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने कहा, “यह बहुत अजीब सी स्थिति है। सैकड़ों बच्चे घायल हो गए। कई बच्चे मारे गए। बच्चों पर लाठीचार्ज हुआ है, कपड़े फाड़े गए हैं। क्याआज जमीर जागा है? अगर यही काम 15-20 दिन पहले हो जाता तो बहुत अच्छा होता। यह वही धर्मेंद्रप्रधान हैं जो कांग्रेस शासनकाल में हुए पर्चे लीक के मामले पर धरने पर बैठे थे। इनका सिर भी फूटा थाऔर हाथ भी टूटा था। आज उन्हें याद नहीं आया, बच्चों की सोच क्या होती है।साजिद रशीदी ने आगे कहा, “बच्चे क्या चाहते हैं? सरकार ने अपने लिए करो या मरो जैसी स्थिति पैदाकर ली। सवाल यह है कि जेन जी इस पर मानेंगे या नहीं मानेंगे। यह बहुत बड़ी बात है। 

अगर जेन जीने मान लिया तो सरकार के लिए अच्छी बात है, लेकिन विपक्षी दल जो इस आंदोलन के पीछे खड़े हैं,वह इस आंदोलन को मरने नहीं देंगे। वह कहेंगे कि अब प्रधानमंत्री का इस्तीफा मांगो। सरकार के झुकने से इनके हौसले बुलंद होंगे।”

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Author: आज का मुद्दा डिजिटल डेस्क

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