आज जब समाज में सफल व्यक्ति की पहचान केवल धन, पद और प्रसिद्धि से की जाने लगी है, तब ऐसे व्यक्तित्व भी हैं जिन्होंने अपने पूरे जीवन से यह सिद्ध किया कि असली सम्मान ईमानदारी, सेवा और सादगी से मिलता है। नोएडा के सेक्टर-14 के अध्यक्ष श्री पी. के. चड्ढा ऐसे ही व्यक्तित्व हैं, जिनसे केवल नोएडा ही नहीं, बल्कि पूरा एनसीआर सीख सकता है।
मैं सन् 1980 में नोएडा आया था। श्री पी. के. चड्ढा भी शुरुआती वर्षों में यहाँ आकर बस गए थे। हमारी मुलाकात 1990 के दशक में एक सामाजिक कार्यक्रम में हुई और तब से लेकर आज तक चार दशक से अधिक समय से मैं उन्हें निकट से जानता हूँ। समय के साथ मैंने उनके व्यक्तित्व का वह पक्ष देखा, जो आज के समय में दुर्लभ होता जा रहा है—सादगी, ईमानदारी, विनम्रता और समाज के प्रति समर्पण।उस समय चार्टर्ड अकाउंटेंट का पेशा केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि उद्योगों और व्यापारियों के मार्गदर्शक का दायित्व निभाता था। नई फैक्ट्रियों की परियोजना रिपोर्ट तैयार करना, उद्योगपतियों को वैधानिक सलाह देना, कर संबंधी विषयों में सही मार्गदर्शन करना और नए उद्यमियों को आगे बढ़ाना—ये सब उनकी जिम्मेदारियाँ थीं। मैंने अपने लंबे परिचय में कभी उन्हें किसी भी व्यक्ति को गलत सलाह देते या अनुचित लाभ का रास्ता बताते नहीं देखा। उनका एक ही सिद्धांत रहा—कानून के दायरे में रहकर ईमानदारी से काम करो, सफलता स्वयं पीछे आएगी।
इसी ईमानदारी ने उन्हें केवल एक सफल चार्टर्ड अकाउंटेंट नहीं बनाया, बल्कि एक आदर्श गुरु भी बनाया। आज देश के विभिन्न हिस्सों में कार्य कर रहे अनेक चार्टर्ड अकाउंटेंट उनके शिष्य हैं। कई बार जब मेरी मुलाकात युवा सीए से होती है और बातचीत में पी. के. चड्ढा जी का नाम आता है, तो उनके चेहरे पर सम्मान दिखाई देता है। वे गर्व से कहते हैं कि उन्हें ऐसे गुरु का मार्गदर्शन मिला जिसने केवल अकाउंटेंसी नहीं सिखाई, बल्कि चरित्र और पेशेवर नैतिकता भी सिखाई।भारतीय परंपरा में कहा गया है—"जैसा गुरु, वैसा शिष्य।" यदि गुरु ईमानदार, अनुशासित और राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानने वाला हो, तो उसके शिष्य भी उसी राह पर चलते हैं। मुझे लगता है कि पी. के. चड्ढा जी की सबसे बड़ी उपलब्धि उनकी अपनी सफलता नहीं, बल्कि उनके वे विद्यार्थी हैं जो आज भी उनके संस्कारों को आगे बढ़ा रहे हैं।
करीब दस वर्षों तक उन्हें देखने और समझने के बाद मैंने स्वयं भी उन्हें अपना चार्टर्ड अकाउंटेंट बनाया। उस दिन मुझे लगा कि मैं केवल किसी पेशेवर सलाहकार के पास नहीं, बल्कि ऐसे व्यक्ति के पास हूँ जिसके लिए विश्वास सबसे बड़ी पूंजी है।आज वे सेक्टर-14 के अध्यक्ष के रूप में कार्य कर रहे हैं। यह पद उनके लिए प्रतिष्ठा का माध्यम नहीं, बल्कि सेवा का अवसर है। क्षेत्र की सड़कें, नालियाँ, पार्क, सफाई, सुरक्षा, नागरिक सुविधाएँ और नोएडा प्राधिकरण से समन्वय—इन सभी विषयों पर वे लगातार सक्रिय रहते हैं। अनेक बार मैंने स्वयं उन्हें अधिकारियों से मिलकर समस्याओं के समाधान के लिए प्रयास करते देखा है। उनका मानना है कि किसी भी पद की असली गरिमा जनता की सेवा में है। उनका पारिवारिक जीवन भी प्रेरणादायक है। पत्नी, पुत्र और बहू—सभी अत्यंत सरल, संस्कारित और सौम्य स्वभाव के हैं। परिवार में परस्पर सम्मान और अपनापन स्पष्ट दिखाई देता है। ऐसे परिवार समाज में सकारात्मक वातावरण का निर्माण करते हैं।
आज आवश्यकता ऐसे नेतृत्व की है जो केवल भाषण न दे, बल्कि स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करे। यदि किसी रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन का अध्यक्ष ईमानदारी से काम करे, लोगों को साथ लेकर चले, अधिकारियों से संवाद बनाए रखे और बिना किसी स्वार्थ के क्षेत्र की समस्याओं के समाधान में जुटा रहे, तो पूरा क्षेत्र बदल सकता है। यही कारण है कि मेरा मानना है कि एनसीआर की विभिन्न रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों के पदाधिकारियों को पी. के. चड्ढा जी के कार्यों का अध्ययन करना चाहिए।इसी प्रकार चार्टर्ड अकाउंटेंसी के क्षेत्र में भी युवा पेशेवरों को उनसे सीखना चाहिए कि एक सफल चार्टर्ड अकाउंटेंट केवल बैलेंस शीट नहीं बनाता, बल्कि अपने पेशे की विश्वसनीयता भी बनाता है। ईमानदारी से कमाया गया सम्मान किसी भी आर्थिक सफलता से कहीं अधिक बड़ा होता है।आज नोएडा की पहचान ऊँची इमारतों, एक्सप्रेस-वे और बड़े उद्योगों से होती है। लेकिन इन सबके पीछे कुछ ऐसे लोग भी हैं जिन्होंने पिछले चार-पाँच दशकों में अपने चरित्र, परिश्रम और सेवा से इस शहर की सामाजिक संस्कृति को मजबूत किया। श्री पी. के. चड्ढा उन्हीं चुनिंदा व्यक्तित्वों में से एक हैं।
देश केवल सरकारों से नहीं चलता। देश तब आगे बढ़ता है जब हर डॉक्टर अपना कर्तव्य निभाए, हर शिक्षक ईमानदारी से पढ़ाए, हर अधिकारी निष्पक्ष होकर निर्णय ले, हर उद्योगपति नैतिकता से व्यापार करे और हर सामाजिक कार्यकर्ता बिना स्वार्थ समाज की सेवा करे। पी. के. चड्ढा का जीवन इसी विचार का जीवंत उदाहरण है।आज जब हम विकसित भारत की बात करते हैं, तब हमें ऐसे लोगों का सम्मान भी करना चाहिए जिन्होंने बिना प्रचार के, बिना किसी व्यक्तिगत लाभ की इच्छा के, दशकों तक समाज और अपने शहर के लिए कार्य किया। ऐसे व्यक्तित्व ही किसी शहर की असली पूँजी होते हैं।
मेरी दृष्टि में श्री पी. के. चड्ढा केवल सेक्टर-14 के अध्यक्ष नहीं हैं, बल्कि नोएडा की उस पीढ़ी के प्रतिनिधि हैं जिसने इस शहर को बनते, बढ़ते और संवरते देखा है। यदि नई पीढ़ी और एनसीआर के सामाजिक संगठन उनके जीवन से प्रेरणा लें, तो समाज में विश्वास, पारदर्शिता और सेवा की भावना और अधिक मजबूत होगी।