आज का मुद्दा/तहसील प्रभारी/नीरज सुदामा डिबाई!
शिव कॉलोनी स्थित मकून्स प्री-स्कूल में श्री गणेश चतुर्थी का उत्सव ऐसा सजा कि पूरा विद्यालय परिसर भक्तिरस और भारतीय संस्कृति के रंग में रंग गया। हरीश पंजाबी द्वारा संचालित विद्यालय में आयोजित भव्य समारोह में नौनिहालों ने अपनी प्रतिभा, अभिनय और नृत्य से उपस्थितजनों का मन मोह लिया।विद्यालय प्रांगण में आकर्षक एवं भव्य पंडाल सजाकर विघ्नहर्ता श्री गणेश जी को विधिविधान से विराजमान कराया गया। विद्यालय निदेशिका रश्मि खुराना एवं प्रधानाचार्या नीरू सिंघल ने गणपति बप्पा की आरती कर विधिवत पूजन किया तथा मोदक का भोग अर्पित किया। पूजा-अर्चना के दौरान विद्यालय परिसर भक्तिमय जयघोषों से गूंज उठा।

समारोह का मुख्य आकर्षण रहा नन्हे कलाकारों का बाल कला संगम, जिसमें बच्चों ने अपनी अद्भुत प्रतिभा का परिचय दिया। अभिजीत ने भगवान गणेश, तन्वी वार्ष्णेय ने माता पार्वती तथा मिशिका एवं अमायरा ने रिद्धि-सिद्धि का स्वरूप धारण कर मनमोहक प्रस्तुति दी। बच्चों ने श्री गणेश जी की बाल कथा तथा माता पार्वती की भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए अखंड प्रतिज्ञा एवं कठोर तपस्या पर आधारित भावपूर्ण नाट्य प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।वहीं ‘गणपति बप्पा मोरया’, ‘देवा श्री गणेशा’ सहित विभिन्न भजनों पर नन्हे कलाकारों की मनमोहक नृत्य प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। बच्चों की भावपूर्ण अदायगी और उत्साह पर पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा। नन्हे भक्तों की प्रस्तुतियों ने यह संदेश भी दिया कि संस्कार और संस्कृति की मजबूत नींव बचपन से ही रखी जाती है।
कार्यक्रम को सफल बनाने में शिक्षिकाओं साक्षी शर्मा, जिया गौतम, इशिता वशिष्ठ, मेघा एवं शिवानी शर्मा, केयरटेकर कमलेश रानी एवं सबीना तथा स्टाफ सदस्यों विवेक सिंह, जीतू सिंह एवं अरुण सागर का विशेष योगदान रहा।समापन अवसर पर सभी बच्चों एवं उपस्थितजनों को प्रसाद स्वरूप मिष्ठान वितरित किया गया। विद्यालय प्रबंधिका रश्मि खुराना ने सभी को गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएं देते हुए बच्चों की प्रस्तुतियों की सराहना की और तालियों के साथ उनका उत्साहवर्धन किया।
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प्रधानाचार्या नीरू सिंघल ने कहा कि धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन बच्चों को अपनी गौरवशाली भारतीय संस्कृति, लोकपरंपराओं और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम हैं। ऐसे आयोजन बच्चों में आत्मविश्वास, रचनात्मकता और अभिव्यक्ति की क्षमता विकसित करने के साथ उनके सर्वांगीण व्यक्तित्व निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।