अंजना भागी
अध्यक्ष, सोशल प्रोग्रेस एसोसिएशन
विघ्नहर्ता, मंगलकर्ता, बुद्धि और ज्ञान के देवता भगवान श्री गणेश के पावन आगमन से आज सेक्टर-11 का वातावरण भक्ति और उल्लास से भर उठा।गणपति जी की महिमा से जुड़ा महाभारत का एक अद्भुत प्रसंग हमें उनके ज्ञान और बुद्धिमत्ता का परिचय कराता है।महाभारत ग्रंथ की रचना से पहले महर्षि वेदव्यास जी ने इच्छा व्यक्त की कि वे महाभारत की कथा बोलेंगे और कोई ऐसा होना चाहिए जो उनकी वाणी के साथ-साथ उसे लिखता जाए, ताकि कथा का प्रवाह बाधित न हो और महाभारत जैसा महान ग्रंथ पूर्ण रूप से लिपिबद्ध हो सके।
कहा जाता है कि देवताओं में से कोई भी इस कठिन कार्य के लिए तैयार नहीं हुआ। तब भगवान श्री गणेश का स्मरण किया गया।
गणपति जी ने इस कार्य को स्वीकार किया, लेकिन एक शर्त रखी कि महर्षि वेदव्यास जी बिना रुके बोलते रहेंगे। महर्षि वेदव्यास जी ने भी अपनी बुद्धिमत्ता से एक शर्त रख दी कि गणपति जी प्रत्येक श्लोक का अर्थ समझकर ही उसे लिखेंगे।इसके बाद महाभारत की रचना आरंभ हुई।महर्षि वेदव्यास जी जिस गति से श्लोक बोलते जाते, गणपति जी उसी अद्भुत गति से उन्हें लिखते जाते। उनकी लेखनी इतनी तीव्र थी कि एक वाक्य पूरा होते ही अगला वाक्य लिखने के लिए वे तैयार रहते। इस प्रकार भगवान श्री गणेश की बुद्धि, एकाग्रता और लेखन-कौशल के सहयोग से महाभारत जैसे महान ग्रंथ की रचना संभव हुई।इसीलिए भगवान गणेश को बुद्धि, ज्ञान, विवेक और शुभारंभ के देवता माना जाता है।

आज जब छाया जी के घर सेक्टर-11 में गणपति बप्पा का आगमन हुआ है, तो यह केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि अपने जीवन में ज्ञान, सद्बुद्धि, सकारात्मकता और आपसी प्रेम को आमंत्रित करने का अवसर भी है।इन दस दिनों तक हम गणपति बप्पा की भक्ति के साथ अपने भीतर के अहंकार, क्रोध, ईर्ष्या और नकारात्मकता को दूर करने का संकल्प लें।
गणपति बप्पा हमारे घर पधारे हैं—
उनके साथ सुख आए, शांति आए, समृद्धि आए और हर विघ्न दूर हो।