बांदा-जसपुरा विकास खंड के अंतर्गत ग्राम पंचायत गडरिया में संचालित अस्थाई,स्थाई गौशाला की स्थिति अत्यंत चिंताजनक,अमानवीय और शर्मनाक है।
गौशाला में लगभग 200 गोवंश संरक्षित हैं,लेकिन पिछले 3 दिन से उन्हें भूसा तक नहीं दिया जा रहा है और जो भूसा दिया जा रहा है।वह सड़ा गला और बदबूदार है,जिसे गोवंश खाने से भी इंकार कर रहे हैं।मौजूद गौशाला कर्मचारियों ने बताया कि अगस्त, सितंबर,अक्टूबर माह तक गोवंशों को बाहर ले जाकर चराया गया है।जबकि 30 अक्टूबर से सभी 200 गोवंशों को ग्राम पंचायत गडरिया की गौशाला में संरक्षित किया गया है।उसके बाद से ही भूसे की भारी कमी शुरू हो गई है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि आखिरकार गोवंशों के नाम पर आवंटित धान,भूसा और धन का बंदरबांट कौन कर रहा है ? इस पूरे भ्रष्टाचार में संयुक्त क्षेत्रीय पशु चिकित्साधिकारी,खंड विकास अधिकारी जसपुरा,ग्राम विकास अधिकारी गडरिया एवं ग्राम प्रधान गडरिया की मिलीभगत से गोवंशों के हक का लाखों रुपया खाया जा रहा है।कागजों में पूरा भूसा,हरा चारा,दाना, दवा और मजदूरी दिखाई जा रही है।लेकिन धरातल पर गौ माता भूख से तड़प रही है।गौ रक्षा समिति के जिलाध्यक्ष महेश प्रजापति ने कहा कि ग्राम पंचायत गडरिया की गौशाला में गौ माता की ऐसी दुर्दशा किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सरकार गौवंशों की सेवा के लिए करोड़ों रुपये दे रही है,लेकिन नीचे बैठे भ्रष्ट अधिकारी और ग्राम प्रधान गडरिया मिलकर उस धन को डकार रहे हैं।3 दिन तक भूसा न देना,सड़ा भूसा खिलाना यह गौ-हत्या के समान महापाप है।सीधे सीधे पशु क्रूरता अधिनियम और सरकारी धन के गबन का मामला बनता है।जिलाधिकारी व मुख्य विकास अधिकारी से मांग की कि ग्राम पंचायत गडरिया गौशाला का तत्काल औचक निरीक्षण कराया जाए।अगर 24 घंटे के अंदर उच्च स्तरीय जांच कर दोषी पशु चिकित्साधिकारी,बीडीओ जसपुरा,वीडीओ और ग्राम प्रधान गडरिया पर मुकदमा दर्ज कर उन्हें निलंबित नहीं किया गया तो गौ रक्षा समिति जिला मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन कर आंदोलन करने को बाध्य होगी।
मांग की कि ग्राम पंचायत गडरिया, जसपुरा की गौशाला में संरक्षित 200 गोवंशों को तत्काल हरा चारा, सूखा भूसा और पानी की समुचित व्यवस्था कराई जाए।पिछले 6 माह के भूसा, दाना, दवा, टिनशेड और मजदूरी के स्टॉक और बिलों की जांच कराई जाए।दोषी पशु चिकित्साधिकारी, बीडीओ जसपुरा व अन्य पर भ्रष्टाचार और पशु क्रूरता अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज हो।गौशाला के भूसा वितरण रजिस्टर और जियो-टैग फोटो को कब्जे में लेकर जांच की जाए।