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Updated: 18 October 2026 | Hindi News Portal
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अनुबंध खत्म, कमाई जारी! चिनार इम्पेक्स पर नोएडा प्राधिकरण के अफसरों की ‘कृपा’ का राज क्या है?

कालिंदी कुंज के बाद रजनीगंधा फुटओवर ब्रिज का नया गड़बड़झाला, अफसरों की भूमिका पर सवाल..... सवाल वही कार्रवाही होंगी तो कैसे

आज का मुद्दा डिजिटल डेस्क | Updated: 08 Sep 2026, 08:53 AM | Views: 0 | 3 मिनट पढ़ें
अनुबंध खत्म, कमाई जारी! चिनार इम्पेक्स पर नोएडा प्राधिकरण के अफसरों की ‘कृपा’ का राज क्या है?

नोएडा। नोएडा प्राधिकरण के फुटओवर ब्रिजों से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। कालिंदी कुंज स्थित फुटओवर ब्रिज में गड़बड़झाले का मामला पहले भी हमारे द्वारा उठाया गया था, लेकिन कार्रवाई के बजाय मामले में लीपापोती करने का प्रयास किया जा रहा है । वहीं अब रजनीगंधा अंडरपास के पास स्थित फुटओवर ब्रिज का एक नया गड़बड़झाला सामने आया है, जिसने नोएडा प्राधिकरण और संबंधित कंपनी के बीच कथित मिलीभगत पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सेक्टर-3 और सेक्टर-19 के बीच एमपी-1 मार्ग स्थित इस फुटओवर ब्रिज का Construction, Development, Operation एवं Maintenance (CDOM) का कार्य चिनार इम्पेक्स, सेक्टर-57, नोएडा को करीब 10 वर्ष के लिए बीओटी लाइसेंस पर दिया गया था। उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार अनुबंध की अवधि 21 अक्टूबर 2025 को समाप्त हो चुकी है। इसके बावजूद फुटओवर ब्रिज पर विज्ञापन और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां जारी रहने की जानकारी सामने आई है।

अनुबंध खत्म तो कमाई किस अधिकार से?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब चिनार इम्पेक्स का अनुबंध 21 अक्टूबर 2025 को समाप्त हो गया तो उसके बाद किस अधिकारी की अनुमति से विज्ञापन और व्यावसायिक गतिविधियां जारी रहीं? क्या कंपनी को वैध समयावृद्धि दी गई? यदि हां, तो किस सक्षम अधिकारी ने मंजूरी दी और किन शर्तों पर? इस दौरान विज्ञापन से कितनी कमाई हुई और नोएडा प्राधिकरण के खाते में कितनी रकम जमा हुई?

कारवाही/जाँच की जगह लीपापोती में लगा बाह्य विज्ञापन विभाग

इसी तरह के सवाल हमने कालिंदी कुंज स्थित फुटओवर ब्रिज को लेकर किए थे लेकिन इन सवालों का स्पष्ट जवाब देने के बजाय प्राधिकरण की ओर से वरिष्ठ प्रबंधक बाह्य विज्ञापन आर.के. शर्मा ने बताया कि फुटओवर ब्रिज के पुनः संचालन एवं अनुरक्षण के लिए पुनः ई-निविदा की पत्रावली प्रक्रिया में है तथा ई-निविदा होने तक संबंधित एजेंसी को समयावृद्धि देने की पत्रावली भी प्रक्रिया में है।

लेकिन सवाल यह है कि ‘पत्रावली प्रक्रिया में है’ का मतलब यह कैसे हो गया कि समाप्त हो चुके अनुबंध के तहत कंपनी की गतिविधियां जारी रहें? यदि समयावृद्धि अभी स्वीकृत ही नहीं हुई थी तो कंपनी को सार्वजनिक संपत्ति के व्यावसायिक इस्तेमाल की अनुमति किस आधार पर मिली?

पहले कालिंदी कुंज, अब रजनीगंधा—कंपनी पर इतनी ‘कृपा’ क्यों?

यह पहला मामला नहीं है जब फुटओवर ब्रिज को लेकर सवाल उठे हैं। कालिंदी कुंज स्थित फुटओवर ब्रिज के गड़बड़झाले को भी पहले उजागर किया गया था। उस मामले में भी अपेक्षित कार्रवाई के बजाय लीपापोती किए जाने की बात सामने आई। अब उसी तरह का एक और मामला सामने आने के बाद सवाल और गंभीर हो गया है कि आखिर चिनार इम्पेक्स पर नोएडा प्राधिकरण के कुछ अधिकारियों की इतनी ‘कृपा’ क्यों बनी हुई है?

क्या अनुबंध समाप्त होने के बाद भी कंपनी को व्यावसायिक गतिविधियां जारी रखने का कोई विशेष संरक्षण मिला हुआ है? क्या प्राधिकरण के अधिकारियों ने कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया? या फिर सरकारी राजस्व की कीमत पर निजी कंपनी को फायदा पहुंचाया जा रहा है? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।

10 साल के राजस्व का हो फोरेंसिक ऑडिट

मामले में वर्ष 2015-16 से अब तक के विज्ञापन राजस्व, लाइसेंस फीस और सभी भुगतानों का स्वतंत्र वित्तीय ऑडिट कराने की जरूरत है। साथ ही अनुबंध, समयावृद्धि और अनुमति से जुड़ी पूरी पत्रावली की जांच, मौके पर स्वीकृत एवं वास्तविक विज्ञापन क्षेत्रफल का भौतिक सत्यापन और 21 अक्टूबर 2025 के बाद की गतिविधियों की वैधता की जांच होनी चाहिए।

यदि जांच में किसी अधिकारी की लापरवाही, मिलीभगत या नियमों की अनदेखी से सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचने की पुष्टि होती है तो जिम्मेदारी तय कर राजस्व की वसूली और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

अब देखना यह है कि नोएडा प्राधिकरण इस बार भी ‘पत्रावली प्रक्रिया में है’ कहकर मामले को ठंडे बस्ते में डालता है या फिर यह पता लगाएगा कि अनुबंध खत्म होने के बाद भी सार्वजनिक संपत्ति पर निजी कंपनी की कमाई का खेल आखिर किसकी अनुमति और संरक्षण में चलता रहा।

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Author: आज का मुद्दा डिजिटल डेस्क

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